आरुषि मर्डर केस: जानें- हर बात जो आप जानना चाहते हैं

नई दिल्ली ( 12 अक्टूबर ): देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री और नोएडा के चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड राजेश तलवार और उनकी पत्नी नूपुर तलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। सबूतों के अभाव में तलवार दंपती को बरी किया गया है। हाई कोर्ट ने कहा कि आरुषि को ममी-पापा ने नहीं मारा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट भी इतनी कठोर सजा नहीं देता है। बताया जा रहा है कि हाई कोर्ट ने तलवार दंपती को तुरंत जेल से रिहा करने का आदेश दिया है।

आरुषि हत्याकांड से जुड़े प्रमुख तथ्य और तर्क जो कोर्ट में सामने आए​

आरुषि केस: जानें कब क्या हुआ?

2008

16 मई : 14 साल की आरुषि बेडरूम में मृत मिली

हत्या का शक घरेलू नौकर हेमराज पर गया

17 मई: हेमराज का शव घर की छत पर मिला

23 मई: दोहरी हत्या के आरोप में डॉ राजेश तलवार गिरफ़्तार

1 जून: सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली

13 जून: डॉ तलवार का कंपाउंडर कृष्णा गिरफ़्तार

बाद में राजकुमार और विजय मंडल भी गिरफ्तार

तीनों को दोहरे हत्या का आरोपी बनाया गया

12 जुलाई: राजेश तलवार डासना जेल से ज़मानत पर रिहा

10 सितंबर, 2009-

मामले की जांच के लिए नई सीबीआई टीम

12 सितंबर: कृष्णा,राजकुमार और मंडल को ज़मानत

सीबीआई 90 दिन में नहीं दे पाई चार्जशीट

29 दिसंबर, 2010

सबूतों के अभाव में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट

रिपोर्ट में तलवार दंपत्ति आरोपी नहीं थे

परिस्थितिजन्य सबूतों से क़ातिल होने का इशारा

25 जनवरी, 2011

क्लोजर रिपोर्ट के ख़िलाफ राजेश तलवार का प्रोटेस्ट पिटीशन

कोर्ट ने भी क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं किया

लेकिन रिपोर्ट के आधार पर आरोप तय किए

तलवार दंपत्ति को सुप्रीम कोर्ट तक भी राहत नहीं

2012

11 जून:  सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई शुरू

2013

10 अक्टूबर: आखिरी बहस शुरू

25 नवंबर:  विशेष अदालत ने तलवार दंपत्ति को दोषी करार देते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई

2014

जनवरी: निचली अदालत के फ़ैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती

2017

8 सितंबर: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने अपील पर फैसला सुरक्षित रखा