विधानसभा में AAP ने EVM में छेड़छाड़ का दिया डेमो

नई दिल्ली (9 मई): भ्रष्टाचार के आरोप से धीरे केजरीवाल सरकार के विधायक सौरभ भारद्वाज कुछ बड़ा खुलासा करने वाले थे। लोगों को उम्मीद थी कि वो कपिल मिश्रा के आरोपों पर कुछ पलटवार करेंगे या फिर इस सिलसिले में कोई बड़ा खुलासा करेंगे। लेकिन एक दिन के लिए बुलाए गए इस विशेष सत्र के दौरान सौरभ भारद्वाज ने सदन की कार्रवाई शुरू होते ही EVM से छेड़छाड़ पर डेमो देना शुरु किया।सौरभ भारद्वाज ने EVM जैसी दिखने वाली मशीन को हैक करने का दावा किया। उन्होंने इस डेमो के जरिए ये साबित करने की कोशिश की वोट वास्तव में किसी और को डाले गए लेकिन काउंटिंग में नतीजे कुछ और आए।


सौरभ ने ईवीएम जैसी एक मशीन पर वोट देकर गड़बड़ी का खुलासा करना शुरु किया. सौरभ ने सदन में आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी को बतौर डेमो वोट दिया। भारद्वाज ने दावा किया कि हैकिंग के लिए सीक्रेट कोड्स का इस्तेमाल होता है और कहा कि 90 सेकेंड में मदरबोर्ड बदल सकता है। उन्होंने 19 वोट डालकर यह दावा किया कि हकीकत में 19 में से 10 वोट AAP को मिलने चाहिए लेकिन हैकिंग होगी तो AAP को 2 ही वोट मिलेंगे और BJP को 11 वोट मिल जाएंगे।


सौरभ ने इस दौरान बताया कि अलग-अलग कोड के जरिए वोटिंग के वक्त ही EVM में गड़बड़ी की जा सकती है।  इस मशीन को कोई भी सामान्य वोटर, वोट देने के दौरान ही छेड़छाड़ कर सकता है। डेमो के दौरान सौरभ ने बताया कि कैसे कोई सामान्य वोटर, अपने मनचाहे वो वोट देता है और अगर वो कोड जो उसे पता है और उसी दौरान वो दबा दे तो उसके बाद सारे वोट उसी पार्टी को जाने लगते हैं। उन्होंने दावा किया कि ईवीएम मशीन में मदरबोर्ड बदलने की देरी होती है और फिर सब कुछ वैसा ही होता है जैसा कोई दल चाहता है। सौरभ ने कहा कि इन भ्रष्टाचारियों से लड़ने के लिए इंजीनियरिंग छोड़ी थी और आज इन्हीं से लड़ने के लिए वापस इंजीनियरिंग का काम किया।


पांच राज्यों में वोटिंग के लिए EVM के इस्तेमाल पर मायावती, हरीश रावत, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं ने सवाल उठाए। इन राज्यों में से यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी को भारी बहुमत मिला है। EVM विवाद के बाद इलेक्शन कमीशन ने कहा था कि मशीन को दो बार चेक किया जाता है। उसे उम्मीदवार के सामने जांचा और सील किया जाता है। वोटों की गिनती से पहले भी EVM को कैंडिडेट्स के सामने खोला जाता है। आपको बता दें कि 1980 में चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को EVM दिखाया था। लेकिन 24 साल बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में इसका पूरे देश में इस्तेमाल शुरू हो सका। आज तक कोई भी चुनाव आयोग को ईवीएम में हैकिंग के पुख्ता सबूत नहीं दे पाया है।