एक दमदार फिल्म है 'दंगल', ‘महावीर की छोरियां किसी छोरे से कम हैं के’

नई दिल्ली ( 23 दिसंबर ): आमिर खान की दंगल एक धाकड़ फिल्म है। न छोरियां छोरों से कम हैं और न आमिर खान किसी से पीछे हैं। यह फिल्म भावनाओं का पारा उस ऊंचाई तक उठाती है जहां पैसा वसूल होने का एहसास जागता है। आप पाते हैं कि दंगल धाकड़ है। नोटबंदी के बाद आपने खुद को सिनेमाघर से दूर रखा है तो बेधड़क इसे देख सकते हैं। इमोशन, एक्शन, फैमिली और ड्रामे से एक कदम आगे यह देशभक्ति के जज्बे तक जाती है और अंत में जयोल्लास को समर्पित राष्ट्रगान की धुन बजती है तो आप सीट छोड़ सावधान की मुद्रा में खड़े होकर तिरंगे को सलाम करते हैं।

राष्ट्रवाद को समर्पित इस दौर में सफलता का इससे बेहतर पैमाना क्या हो सकता है? दंगल की कहानी ऐसे समाज में स्थित है जहां स्त्री अपनी भूमिका को सार्थक सिद्ध करने का संघर्ष कर रही है और एक पहलवान, पत्नी से बेटे की उम्मीद पाले है। उसे लगता है कि बेटा ही उसका सपना पूरा कर सकता है।

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 निर्माताः सिद्धार्थ रॉय कपूर/आमिर खान

-निर्देशकः नितेश तिवारी

-सितारेः आमिर खान, साक्षी तंवर, फातिमा सना शेख, सानिया मल्होत्रा