शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए जरूरी हो सकता है आधार कार्ड

नई दिल्ली (10 अगस्त): केंद्र सरकार अब शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए भी आधार कार्ड को अनिवार्य कर सकती है। शेयर बाजार रेग्युलेटर सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) और सरकार आधार कार्ड को फाइनैंशल मार्केट ट्रांजैक्शन से लिंक करने की योजना बना रहे हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से शेयर बाजार में ब्लैकमनी को सफेद बनाने के खेल को रोकने में मदद मिलेगी। आपको बता दें कि फिलहाल ब्रोकर्स या म्यूचुअल फंड कंपनियों को आधार नंबर नहीं बताना होता और निवेशकों की पहचान पैन के जरिए होती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार को लग रहा है कि पैन टैक्स चोरी रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए वह आधार पर दांव लगा रही है। सेबी के बड़े अधिकारियों ने कुछ मार्केट इंटरमीडियरी को इस बारे में अनौपचारिक तौर पर जानकारी दी है। उन्हें बताया गया है कि फाइनैंशल मार्केट ट्रांजैक्शंस के लिए आधार नंबर को अनिवार्य बनाया जा सकता है। 

यह नहीं पता है कि इसका ऐलान कब होगा। यह भी पता नहीं है कि क्या इस मामले में आधार, पैन की जगह लेगा। सरकार पहले आधार को पैन, बैंक अकाउंट और मोबाइल फोन से लिंक करने की बात कह चुकी है। बैंक अकाउंट रखने वालों को इस साल 31 दिसंबर तक आधार डिटेल्स अपने बैंक को देनी होगी।

ऑनलाइन म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शंस के लिए आधार का इस्तेमाल नो योर क्लाइंट (केवाईसी) चेक के लिए किया जा सकता है। आधार से ऑनलाइन केवाईसी (ई-केवाईसी) करने वाले इनवेस्टर्स को म्यूचुअल फंड के पास जाकर फॉर्म जमा करने की जरूरत नहीं पड़ती और न ही उन्हें सिग्नेचर मिलाने के लिए वहां जाना पड़ता है। कुछ ब्रोकर अपनी इंडस्ट्री के लिए आधार ई-केवाईसी की सहूलियत की मांग कर रहे हैं। ब्रोकरों का कहना है कि आधार को अनिवार्य बनाने से स्टॉक मार्केट से जुड़ी कुछ गड़बड़ियों को दूर करने में मदद मिलेगी। 

ब्रोकरों का कहना है कि मल्टीपल पैन और फेक डीमैट अकाउंट्स के जरिए अभी भी काला धन शेयर बाजार में लाया जा रहा है। आधार को अनिवार्य बनाए जाने के बाद कितने पुराने क्लाइंट उसके साथ बने रहेंगे? इससे आईपीओ मार्केट में भी पार्टिसिपेशन कम होगा, लेकिन यह अस्थायी दिक्कत होगी।