आधार से पकड़ में आए 80 हजार 'चोर' टीचर, ऐसे लगा रहे थे करोड़ों का चूना

नई दिल्ली ( 6 जनवरी ): आधार नंबर अनिवार्य किए जाने के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों को लेकर देशभर में किए गए सर्वे (AISHE) 2016-17 में 80 हजार से ज्यादा ऐसे शिक्षकों का पता चला है, जो देश के तीन या इससे ज्यादा उच्च शिक्षण संस्थानों में फैकल्टी मेंबर थे। शुक्रवार को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने AISHE 2016-17 रिपोर्ट जारी करते हुए यह जानकारी दी। हालांकि मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने यह स्पष्ट किया कि इनमें से कोई भी शिक्षक किसी केन्द्रीय विश्वविद्यालय से नहीं है।

प्रकाश जावडेकर ने एक कार्यक्रम में कहा कि कुछ ऐसे फर्जी शिक्षक हैं, जो छद्म (proxy) तरीका अपनाते हैं और कई जगहों पर पूर्णकालिक पढ़ा रहे हैं। आधार शुरू होने के बाद ऐसे 80 हजार शिक्षकों की पहचान हुई है और उनके खिलाफ कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी केन्द्रीय विश्विवद्यालय में फर्जी शिक्षकों की पहचान नहीं हुई है, लेकिन कुछ राज्य और निजी विश्वविद्यालयों में ऐसे शिक्षक हैं।

मंत्रालय ने सभी विश्वविद्यालयों से सभी कर्मचारियों और छात्रों से आधार नंबर मांगने के लिए कहा है, ताकि डुप्लीकेशन न हो। हालांकि आधार के डेटा लीक होने को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। 

आधार डेटा लीक होने की मीडिया की खबरों के बीच इन 80 हजार शिक्षकों की पहचान होने की बात सामने आई है। गुरुवार को एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उसने 500 रुपये में करोड़ों आधार कार्ड की जानकारी हासिल की है। 

अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया कि उसने एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए 500 रुपये में ये सर्विस खरीदी और करीब 100 करोड़ आधार कार्ड का एक्सेस मिल गया। हालांकि UIDAI ने आधार डेटा लीक होने की आशंका से इनकार किया है।