आधार कार्ड के बिना आपको नहीं मिलेगा EPS का फायदा

नई दिल्ली ( 7 जनवरी ):  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने 50 लाख पेंशनभोगियों और करीब चार करोड़ अंशधारकों के लिए जनवरी के अंत तक आधार संख्या उपलब्ध कराने को अनिवार्य कर दिया है। जिन अंशधारकों या पेंशनभोगियों के पास आधार कार्ड नहीं है, उन्हें इस महीने के आखिर तक यह सबूत देना होगा कि उन्होंने इसके लिए आवेदन कर दिया है। यह ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठाने के लिए जरूरी है। इस संबंध में श्रम मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है।

ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त वीपी जॉय ने कहा कि फिलहाल पेंशनभोगियों के साथ-साथ अंशधारकों को आधार या पंजीकरण प्रति 31 जनवरी, 2017 तक उपलब्ध कराना होगा। यह ईपीएफओ की ओर से उपलब्ध सेवाएं हासिल करने के लिए जरूरी है। हम इस महीने के अंत में स्थिति की समीक्षा करेंगे। इसके बाद अंशधारकों और पेंशनभोगियों को 12 अंकों वाला आधार संख्या देने के लिए कुछ और समय दे सकते हैं। ईपीएफओ ने अपने 120 क्षेत्रीय कार्यालयों से इस बारे में नियोक्ताओं के जरिये अंशधारकों और पेंशनभोगियों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा है।

इसके अलावा, ईपीएफओ ने नियोक्ता फर्मों के लिए एक ‘माफी योजना’ पेश की है। इसके तहत ऐसे नियोक्ता जिन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की योजनाओं के तहत अपने कर्मचारियों का पंजीकरण नहीं कराया है, तीन महीने के इस अभियान के तहत एक रुपए देकर कर्मचारियों का पंजीकरण करा सकेंगे।

यह योजना एक जनवरी से शुरू हुई है। ईपीएफओ ने इसे नामांकन और प्रतिष्ठान कवरेज अभियान-2017 का नाम दिया है। इसके तहत ईपीएफओ अंशधारकों, नियोक्ता, कर्मचारी संगठनों और राज्यों के साथ बैठक करेगा।

इस अभियान के तहत प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना (पीएमआरपीवाई) और प्रधानमंत्री परिधान प्रोत्साहन योजना (पीएमपीआरपीवाई) के लाभ के बारे में प्रचार किया जाएगा। इस अभियान की प्रमुख बात कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन नामांकन की सुविधा है।

योजना के तहत एक जनवरी से 31 मार्च, 2017 तक तीन महीने की खिड़की उपलब्ध कराई जाएगी। कोई भी नियोक्ता अभियान की अवधि के दौरान अपने एक अप्रैल, 2009 से लेकर एक जनवरी, 2017 से पहले के ऐसे कर्मचारी के बारे में घोषणापत्र भेज सकता है जो सदस्य बनने चाहिए थे या बनने के पात्र हैं पर किन्हीं कारणों से उनका पंजीकरण नहीं कराया जा सका।

इस अभियान के तहत की गई घोषणा में नियोक्ता को कंर्मचारी की भविष्य निधि में अंशदान और कानून के प्रावधान के तहत देय ब्याज का भुगतान करना होगा।