इस लड़की को ISIS ने बनाया था सेक्‍स स्‍लेव, सुनाई दर्दनाक कहानी

नई दिल्‍ली (16 जनवरी): आतंकी संगठन आईएसआईएस आतंकियों के कब्जे से छूटी नादिया मुराद कई महीनों की यौन प्रताडऩा झेलने के बाद वह किसी तरह उनके चंगुल से भागने में सफल रहीं। अब उसने यजीदी लड़कियों पर हो रहे जुल्म की कहानियां दुनिया के सामने रखी।   नादिया ने बताया कि इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों के आने से पहले मैं अपनी मां और भाई बहनों के साथ उत्तरी इराक के शिंजा के पास कोचू गांव में रहती थी। मैं तब छठी कक्षा में पढ़ती थी। बीते साल अगस्त में शिंजा पर इस्लामिक स्टेट के हमले के बाद अधिकतर यजीदी परिवार घर छोड़कर चले गए। 3 अगस्त 2014 की बात है, जब आईएस ने हमला किया। कुछ लोग माउंट शिंजा पर भाग गए, लेकिन हमारा गांव बहुत दूर था। हम भागकर कहीं नहीं जा सकते थे। हमें 3 से 15 अगस्त तक बंधक बनाए रखा गया। हम पूरी तरह घिर चुके थे। हमें चेतावनी दी गई कि हम दो दिन के अंदर अपना धर्म बदल लें।   15 अगस्त को मैं अपने परिवार के साथ थी। हम बहुत डरे हुए थे क्योंकि हमारे सामने जो घटा था, उसे लेकर हम भयभीत थे। उस दिन आईएस के लगभग 1000 लड़ाके गांव में घुसे। महिला होने के नाते हमें यकीन था कि वे हमें नहीं मारेंगे और हमें जिंदा रखेंगे। जब वो मर्दों को स्कूल से बाहर ले जा रहे थे तो सही-सही तो पता नहीं कि किसके साथ क्या हो रहा था, लेकिन हमें गोलियां चलने की आवाजें आ रही थी। हमें नहीं पता कि कौन मारा जा रहा था। मेरे भाई और दूसरे लोग मारे जा रहे थे। जब उन्होंने लोगों को मार दिया तो वे हमें एक दूसरे गांव में ले गए। तब तक रात हो गई थी और उन्होंने हमें वहां स्कूल में रखा। उन्होंने हमें तीन ग्रुपों में बांट दिया था। पहले ग्रुप में युवा महिलाएं थी, दूसरे में बच्चे, तीसरे ग्रुप में बाकी महिलाएं।   हर ग्रुप के लिए उनके पास अलग योजना थी। बच्चों को वो प्रशिक्षण शिविर में ले गए। जिन महिलाओं को उन्होंने शादी के लायक नहीं माना उन्हें कत्ल कर दिया, इनमें मेरी मां भी शामिल थी। रात में वो हमें मोसुल ले गए जहां उन्होंने हमारा बलात्कार किया। वे हमें मोसुल में इस्लामिक कोर्ट में ले गए। जहां उन्होंने हर महिला की तस्वीर ली। हर तस्वीर के साथ एक फोन नंबर होता था। ये फोन नंबर उस लड़ाके का होता था जो उसके लिए जिम्मेदार होता था। तमाम जगह से आईएस लड़ाके इस्लामिक कोर्ट आते और तस्वीरों को देखकर अपने लिए लड़कियां चुनते।   पहली रात जब उन्होंने हमें लड़ाकों के पास भेजा। बहुत मोटा लड़ाका था जो मुझे चाहता था, मैं उसे बिल्कुल नहीं चाहती थी। जब हम सेंटर पर गए तो मैं फर्श पर थी, मैंने उस व्यक्ति के पैर देखे। मैं उसके सामने गिड़गिड़ाने लगी कि मैं उसके साथ नहीं जाना चाहती। मैं गिड़गिड़ाती रही, लेकिन मेरी एक नहीं सुनी गई। एक हफ्ते बाद मैंने भागने की कोशिश की। वे मुझे कोर्ट में ले गए और सजा के तौर पर छह सुरक्षा गार्डों ने मेरे साथ बलात्कार किया। तीन महीने तक मेरा यौन उत्पीडऩ होता रहा। इस इलाके में चारों तरफ आईएस के लड़ाके ही फैले हैं। तो इन महीनों में मुझे भागने का मौका ही नहीं मिला। एक बार मैं एक पुरुष के साथ थी। वो मेरे लिए कुछ कपड़े खरीदना चाहता था, क्योंकि उसका इरादा मुझे बेच देने का था। जब वो दुकान पर गया। मैं घर पर अकेली थी और मैं वहां से भाग निकली। मैं मोसुल की गलियों में भाग रही थी। मैंने एक मुस्लिम परिवार का दरवाजा खटखटाया और उन्हें अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने मेरी मदद की और कुर्दिस्तान की सीमा तक पहुंचाने में मेरी मदद की।