200 देशों में योग दिवस मनाया जाना भारत के लिए गौरव की बात: योग गुरु बाबा रामदेव

न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 20 जून ): योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा है कि विश्व के 200 देशों में एक साथ 21 जून को एक साथ योग दिवस मनाया जाना भारत को इस क्षेत्र में बहुत बड़ा गौरव दिला रहा है। 

चौथे अंतरराष्ट्रीय विश्व योग दिवस के मौके पर न्यूज 24 से एक्सक्लूसिव बातचीत में बाबा रामदेव ने कहा कि इस बार राजस्थान के कोटा में योग का सबसे बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खास तौर पर उन्हें कोटा में ही इस कार्यक्रम के आयोजन को कहा था ताकि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के बच्चे जो कि यहां कोचिंग के लिए आते हैं वे तनाव मुक्त होकर और बेहतर तरीके से अपनी पढ़ाई पूरी कर उन्नत भारत के निर्माण में सहयोग कर सकें ।

 योग गुरु की माने तो गुरुवार को कोटा में आयोजित कार्यक्रम में ढाई लाख से भी ज्यादा लोग एक साथ मिलकर भाग लेंगे और यहां पर 100 से भी ज्यादा योग से जुड़े विश्व रिकॉर्ड बनेंगे। इन विश्व रिकॉर्ड की महत्वता बताते हुए बाबा रामदेव ने कहा इनके जरिए लोगों को यह समझाने में सहायता मिलेगी कि योग कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिससे कि कोई दिक्कत आती है इस तरह की भ्रांति पूरी तरह खत्म करने में यह रिकॉर्ड सहायक साबित होंगे। 

बाबा रामदेव ने कहा कि योग के जरिए रोगमक्त हिंसा मुक्त और व्यसन मुक्त समृद्ध राष्ट्र बन सके इसके लिए उनका अभियान लगातार जारी रहेगा।  बाबा रामदेव की माने तो कोटा अब तक एजुकेशन हब के रूप में जाना जाता है, लेकिन वह इसे स्प्रिचुअल हब और स्ट्रेस फ्री सिटी के रूप में नई पहचान दिलाना चाहते हैं उसी के चलते इस बार कोटा को इतने बड़े आयोजन के लिए चुना गया है। 

पिछले 2 दिनों से कोटा के अलग-अलग कोचिंग संस्थानों में जाकर छात्रों को तनाव मुक्त रहने का पाठ सिखा रहे बाबा रामदेव की माने तो उन्होंने यहां के कोचिंग सेंटर के मालिकों को भी नियमित रूप से छात्रों को अनुलोम विलोम और योग से जुड़े कई सरल आसन छात्रों को नियमित रूप से कराने का अनुरोध किया है ।

योग को लेकर उत्पन्न कुछ भ्रांति और इसका विरोध कर रहे लोगों के लिए योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि वह योग शिविर के जरिए कभी भी राजनीतिक बात नहीं करते हैं और उनसे जुड़ी सभी आलोचनाओं का अपने कर्म से जवाब दे रहे हैं । जहां तक उन पर लगे आरोपों की बात है किसी राजनीतिक दल का भी इसके जरिए प्रचार नहीं कर रहे हैं बल्कि वह इस मामले में सर्वदलीय और निर्दलीय हैं जो कि अपने कर्म पर ही विश्वास रखते हैं।