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सीपेक के विरोधियों पर पाकिस्तान में दमनचक्र जारी

पाकिस्तानी आर्मी सीपेक का विरोध करने वालों की आतंकी बताकर नृशंस हत्या कर रही है चीन के खिलाफ बोलने और लिखने पर सख्त पाबंदी है। इसके अलावा सियासी दलों के वे नेता जो सीपेक के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करते हैं उन्हें किसी न किसी तरीके से चुप करा दिया जाता है

न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली (15 मई): पाकिस्तानी आर्मी सीपेक का विरोध करने वालों की आतंकी बताकर नृशंस हत्या कर रही है चीन के खिलाफ बोलने और लिखने पर सख्त पाबंदी है। इसके अलावा सियासी दलों के वे नेता जो सीपेक के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करते हैं उन्हें किसी न किसी तरीके से चुप करा दिया जाता है। पाकिस्तानी आर्मी का खौफ इतना है कि लोग सीपेक पर आपस में भी चर्चा नहीं करने से डरते हैं। चीन ने लगभग 63 बिलियन डॉलर सीपेक में इनवेस्ट किये हैं। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ने वाली 63 अरब डॉलर की लागत वाली सीपीईसी, ‘बेल्ट ऐंड रोड इनिशटिव’(बीआरआई) की अहम परियोजना है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2013 में सत्ता में आने के बाद बीआरआई की शुरुआत की थी। चीन के बीआरआई प्रॉजेक्ट का उद्देश्य दक्षिणपूर्व एशिया, मध्य एशिया, गल्फ क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप के साथ जमीनी और समुद्री मार्गों का नेटवर्क खड़ा करना है।

जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी स्कूल फॉर अडवांस्ड इंटरनैशनल स्टडीज की शमीला चौधरी ने पिछले हफ्ते संसदीय समिति को बताया कि स्थानीय स्तर पर जो लोग सीपीईसी की आलोचना करते हैं, उन्हें अक्सर आतंकवादी करार दे दिया जाता है। ओबामा प्रशासन में सेवाएं दे चुकीं चौधरी ने कहा, ‘पाकिस्तानी मीडिया में आपको शायद ही कोई ऐसा लेख दिखेगा जिसमें सीपीईसी की आलोचना की गई हो। ऐसा बहुत दुर्लभ है।’चीन के विकास के मॉडल के संबंध में सांसदों के प्रश्नों के उत्तर में चौधरी ने कहा कि अमेरिका के सॉफ्ट पावर के बिल्कुल उलट चीन का विकास मॉडल लोगों के बीच आपसी संबंधों को बढ़ावा नहीं देता है। उन्होंने कहा कि चीन ने पाकिस्तान में पैसा सिर्फ लाभ कमाने और अपने रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए लगाया  है। पाकिस्तान हितों से उसे कोई लेना-देना नहीं है। सीपेक में काम करने वाले चीनी नाागरिक चीनी नागरिकों के लिए आरक्षित एनक्लेव्ज में ही रहते हैं। पाकिस्तान के स्थानीय लोग इसे चीनी कॉलोनी भी कहते हैं। ये लोग अपने रेस्त्रां में ही खाने जाते हैं। यह सब चीजें चीन, पाक या चीन के किसी भी देश के साथ सहयोग के लिहाज से ठीक नहीं हैं। दरअसल,  पाकिस्तान को दी जाने वाली चीनी वित्तीय सहायता गोपनीय रखी जा रही थी हाल ही में पहली बार  पाकिस्तान ने सीपेक पर मिली मदद के दस्तावेज राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से साझा किये हैं।

उन्होंने कहा कि सीपीईसी परियोजना भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधों को बिगाड़कर अमेरिका के क्षेत्रीय हितों को भी नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने कहा, 'चीन का निगरानी का प्रावधान, डेटा कलेक्शन की क्षमता और पाकिस्तानी सेना को नए सामान देने से- ऐसा लगता है कि इससे सुरक्षा स्थिति सुधर सकती है लेकिन ऐसी चीजें निजता के उल्लंघन, सूचना के दुरुपयोग और डेटा के गलत इस्तेमाल के खतरे को भी बढ़ा देती हैं।'Images Courtesy:Google


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