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साउथ चाइना सी: सैन्य अभ्यास से अपने दावे को मजबूत करने की नीति पर काम कर रहा है चीन

दक्षिण चीन सागर में चीन की विस्तारवादी नीति और महत्वाकांक्षा किसी से छिपी हुई नहीं है। चीन इस क्षेत्र में सैन्य अभ्यास के जरिए लंबे अरसे से लगातार अपनी महत्वाकांक्षा को विस्तार करने में जुटा है

south-china-sea-chinaImage Credit: Google

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (9 जुलाई): दक्षिण चीन सागर में चीन की विस्तारवादी नीति और महत्वाकांक्षा किसी से छिपी हुई नहीं है। चीन इस क्षेत्र में सैन्य अभ्यास के जरिए लंबे अरसे से लगातार अपनी महत्वाकांक्षा को विस्तार करने में जुटा है। चीन अपने सैन्य अभ्यास के जरिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग पर दावों को मजबूत करने में जुटा है। पीसीए सत्तारूढ़ की तीसरी सालगिरह पर चीन फिलीपींस के पक्ष में सैन्य अभ्यास कर रहा है। चीन परासल और स्प्रैटली द्वीप समूहों पर ये अभ्यास कर रहा है। यहां चीन की नौसेना, तटरक्षक बल और मेरिटाइम मिलिशिया लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहती है।

दरअसल, चीन के अलावा पांच अन्य देश वियतनाम, मलयेशिया, इंडोनेशिया, ब्रुनेई और फिलिपिंस दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा जताते हैं। बीजिंग ने इस क्षेत्र में कई विवादित विशेषताओं पर उन्नत हथियार प्रणालियां लगाई हैं, जिनमें सात द्वीपों पर यह शामिल है जो कि मूंगे के टोलों के ऊपर रेत और कंक्रीट को जमा करते हैं। उनमें से कुछ अब बंदरगाह, हवाई पट्टी, रडार और मिसाइल स्टेशनों से लैस हैं, जो क्षेत्र में अन्य सैन्य बलों द्वारा गतिविधि की निगरानी और संभावित नियंत्रण के लिए चीन की क्षमता का विस्तार कर रहे हैं। फिलीपींस बनाम चीन (पीसीए केस नंबर 2013-19), जिसे दक्षिण चीन सागर पंचाट के रूप में भी जाना जाता है, एक मध्यस्थता मामला था। आपको बता दें कि चीन इंटरनेशनल कोर्ट में दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर पहले ही मुंह की खा चुका है। हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ने पेइचिंग के एससीएस पर दावे को खारिज कर उसे गैरकानूनी और अतिक्रमण वाला बताया था। लेकिन चीन ने कोर्ट के फैसले को नकार दिया। विश्लेषकों के मुताबिक, चीन पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अपने एयर डिफेंस को मजबूत करने में लगा है।

जानकारों का कहना है कि यहां पर मौजूद निजी नौकाओं पर भी चीन ने इस तरह के हथियार लगाए गए हैं। हालांकि, ये हथियार कहने के लिए पायलट को सिर्फ आगाह करने के लिए लगाए हैं, लेकिन इनके हमले का असर कई दिनों तक पायलट पर रहता है।  दक्षिण चीन सागर पर अमेरिका और चीन के तल्‍खी भरे रिश्‍ते किसी से छिपे नहीं है।दक्षिण चीन सागर के विवादित समुद्री इलाके के अन्‍य दावेदारों द्वारा की जा रही बयानबाजी के बाद चीन तिलमिलाया हुआ है। चीन ने अमेरिका को कड़े स्‍वर में जवाब देते हुए कहा है कि इस इलाके में 29 जून से 3 जुलाई तक मिलिट्री एक्‍सरसाइज की थी। इसकी घोषणा पहले ही चीन ने कर दी थी। चीन ने ये भी कहा कि इस एक्‍सरसाइज के बाद किसी भी तरह का कोई तनाव पैदा नहीं हुआ था। चीन ने कहा कि पेंटागन द्वारा यहां के द्वीप से मिसाइल दागे जाने की खबर पूरी तरह से झूठी और भटकाने वाली है। पिछले दिनों अमेरिका में पेंटागन की तरफ से इस बात का दावा किया गया था कि विवादित समुद्री इलाके (एससीएस) में स्थित नानशा टापू से पीएलए ने मिसाइल लॉन्‍च की है। पेंटागन के मुताबिक, यह मिसाइल पूरी तरह से स्‍वदेशी तकनीक पर निर्मित थी और टापू पर पीएलए द्वारा बनाए गए स्‍ट्रक्‍चर से इसको छोड़ा गया था। अमेरिका ने आगे बढ़ते हुए यहां तक कहा कि चीन के इस कदम से इस विवादित समुद्री इलाके के दूसरे दावेदारों और चीन के बीच विवाद बढ़ सकता है।


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