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यूक्रेन और रूस में कभी भी हो सकता है युद्ध, ले सकता है तीसरे विश्व युद्ध का रूप!

रूस पर इस वक्त खून सवार है और यूक्रेन को तबाह और बर्बाद करने के लिए पुतिन किसी भी हद को पार करने को तैयार है। यूक्रेन रुस के तांडव से बचने के लिए नाटो से मदद मांग र

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न्यूज 24 ब्यूरो, मुंबई (3 दिसंबर): रूस पर इस वक्त खून सवार है और यूक्रेन को तबाह और बर्बाद करने के लिए पुतिन किसी भी हद को पार करने को तैयार है। यूक्रेन रुस के तांडव से बचने के लिए नाटो से मदद मांग रहा है। एक बार फिर यूक्रेन में रुस 2014 जैसा नरसंहार मचाने का षडयंत्र रच रहा है। बस वो चाहता है कि एक बार यूक्रेन उसकी सेना पर हमला कर दे, उसके बाद पुतिन की सेनाएं यूक्रेन के लिए यमराज बन जाएंगी।

इस वक्त रूस का पड़ोसी देश यूक्रेन, रुसी सेनाओं के निशाने पर आ गया है। पूरी दुनिया जानती है कि रुस यूक्रेन को जरा भी बर्दाश्त नहीं करता है। रुस ने जिस तरह से कुछ दिन पहले यूक्रेन की नौसेना के तीन जहाजों पर हमला कर उन्हें अपने कब्जे में ले लिया, वो निश्चित रुप से भड़काऊ कदम था। रुस ने अपने जंगी जहाज से यूक्रेन के जहाज को पहले जबरदस्त टक्कर मारी और उसके बाद उसके तीन जहाजों को जब्त कर लिया। रुस के इस अक्रामक कदम से जबरदस्त जंग हो सकती है।

रूस का आरोप है कि यूक्रेन की नौसेना ने क्रीमियाई प्रायद्वीप स्थित उसकी जल सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश की। ऐसे में उसे नौसेना को रोकने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ा है। फिलहाल जंगी हालात में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस मामले में एक आपात बैठक बुलाई है। रुस की सख्त कार्रवाई के बाद यूक्रेन भी अक्रामक हो गया है। रुस पर पलटवार करते हुए यूक्रेन यूक्रेन ने रूस की सीमा, काला सागर और अजोव सागर से लगे 10 क्षेत्रों में 30 दिन के लिए मार्शल लॉ लगा दिया है। 16 से 60 साल तक की आयु वाले रूसी पुरूषों को पूरी तरह से यूक्रेन में घुसने पर रोक लगा दी गई है। रूस ने यूक्रेन के जहाजों पर कब्जा करके उसके 24 नाविकों को बंधक बना लिया था। इस घटना से नाराज अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी-20 शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के साथ अपनी पहले से तय बैठक को रद्द कर दिया।

यूक्रेन के राष्ट्रपति पेत्रो पोरोशेंको ने रूस से निपटने के लिए नाटो सेना से इलाके में जंगी जहाज और फौज भेजने के लिए कहा है। यूक्रेन खुद को युद्ध की तैयारी करने में झोंक चुका है। यूक्रेन की सैनिक से लेकर जनरल तक, युद्ध को लेकर पूरी तरह से फोकस हो चुके हैं। आलम ये है, कि यूक्रेन ने एक कदम आगे बढ़ते हुए जंग के मैदान में अपने टैंक, लड़ाकू विमान, जंगी जहाज और सैनिको से पूरी ताकत से रूस से मुकाबला करने के आदेश दे दिए हैं। यूक्रेन को ये हिम्मत नाटो देशों के समर्थन से मिल रही है। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने भी विवाद की पूरी जिम्मेदारी रूस पर डाल दी है।

नाटो यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन में 28 देश शामिल हैं, जिसमें 70 लाख से ज्यादा सैनिक है। एक अनुमान के मुताबिक विश्व का कुल रक्षा बजट का 70 फीसदी हिस्सा नाटो देशों के पास है। ऐसे में नाटो की फौजी ताकत का मुकाबला करना रूस के बस की बात नहीं है, लेकिन पुतिन के दिमाग में क्या चल रहा है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।


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