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भारत को मिलेगी हैदराबाद के निजाम की 325 करोड़ की दौलत

साल 1954 से भारत पाकिस्तान के बीच चली आ रही हैदराबाद के निजाम की दौलत की जंग अब जाकर नतीजे पर पहुंची है। भारत (India) को निजाम की 325 करोड़ रुपए की दौलत मिल गई है।

नई दिल्ली, 14 फरवरी: साल 1954 से भारत पाकिस्तान के बीच चली आ रही हैदराबाद के निजाम की दौलत की जंग अब जाकर नतीजे पर पहुंची है। भारत (India) को निजाम की 325 करोड़ रुपए की दौलत मिल गई है। ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने भारत के हक में फैसला सुनाते हुए पाकिस्तान को खजाना लौटाने का फैसला सुनाया था। हैदराबाद के निजाम की ये रकम लंदन के नेशनल वेस्टमिनिस्टर बैंक में जमा थी जो अब भारत को सौंप दी गई है। भारत के केस लड़ने में खर्च हुई रकम का एक बड़ा हिस्सा जोकि 26 करोड़ है वो भी पाकिस्तान को भारत को देना होगा।

ये पूरी रकम हैदराबाद के सातवें निजाम मीर उस्मान अली की थी, जिस पर पाकिस्तान ने धोखे से कब्जा जमा लिया था और उसे भारत के हवाले करने के लिए तैयार नहीं था। करीब सात दशक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब ब्रिटेन के हाई कोर्ट ने ये पूरा पैसा भारत के हवाले करने का आदेश दिया है।

कैसे पाकिस्‍तान ने कब्‍जाया निमाज का खजाना

ये विवाद शुरू होता है देश की आजादी के साल 1947 से। तब बंटवारे के बाद जिन रियासतों के हिंदुस्तान या पाकिस्तान में विलय को लेकर विवाद गहराया उनमें हैदराबाद का नाम भी शामिल था, जिसके निजाम ने तब हैदराबाद का भारत में विलय करने से इनकार कर दिया था। उसके बाद भारत ने ऑपरेशन पोलो चलाकर हैदराबाद के निजाम को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया था।

साल 1948 में जब हैदराबाद के विलय के लिए भारत सरकार ने सैन्य कार्रवाई का ऐलान किया। उस वक्त हैदराबाद आसफ जाह वंश के सातवें शासक नवाब मीर उस्मान अली खान सिद्दिकी की रियासत हुआ करती थी। मीर उस्मान अली को तब दुनिया का सबसे अमीर शख्स माना जाता था, क्योंकि उनके खजाने में अरबों-खरबों के हीरे जवाहरात और सोना चांदी था, जिसमें दुनिया का सातवां सबसे बड़ा अनकट हीरा जैकब भी शामिल था।

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दरअसल भारतीय सेना की कार्रवाई से डर कर हैदराबाद के निजाम ने तब एक बहुत बड़ी रकम पाकिस्तान के हवाले कर दी थी। निजाम परिवार के मुताबिक, ऑपरेशन पोलो के दौरान हैदराबाद के निजाम के वित्त मंत्री ने पैसों को सुरक्षित रखने के इरादे से करीब 10 लाख पाउंड उस वक्त पाकिस्तान के हाई कमिश्नर इब्राहिम रहीमतुल्ला के लंदन वाले बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। जब निजाम मीर उस्मान को पैसों के ट्रांसफर के बारे में पता चला तो उन्होंने पैसे वापस करने को कहा पर रहीमतुल्ला ने पैसे वापस करने से इनकार करते हुए कहा कि ये अब पाकिस्तान की संपत्ति बन गई है।

जाहिर है लालची पाकिस्तान की नीयत खराब हो गई थी और वो किसी भी सूरत में हाथ आए पैसे को वापस देने के लिए तैयार नहीं था। ऐसे में शुरू हुई भारत-पाकिस्तान के इतिहास की सबसे लंबी कानूनी लड़ाई। भारत में विलय के बाद हैदराबाद के निजाम ने पाकिस्तान के कब्जे से पैसे निकालने के लिए अदालती रास्ता पकड़ा, जिसे मंजिल तक पहुंचने में लग गए पूरे 70 साल।


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