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ऐसे बना इजरायल, इसलिए मुस्लिम देशों को मानता है दुश्मन

नई दिल्ली (14 जनवरी): जब भी इजरायल की बात होती है तो लोग सिर्फ बात करते हैं एक ऐसे यहूदी देश की जो चारों तरफ से मुस्लिम देशों से घिरा हुआ है। हालांकि आज इजरायल के अपने सभी पड़ोसी मुस्लिम देशों से बेहद ही खराब रिश्ते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह सब शुरू से ही ऐसे थे।

ऐसे बना इजरायल...

एक समय था जब इजरायल के नाम से जाने जानी वाली जगह बेहद ही शांत थी और यहां पर यहूदी और मुस्लिम सभी शांति से रहते थे। इस दिक्कत की शुरुआत तब हुई जब ब्रिटेन का राज ख़त्म होने के बाद मुस्लिम देश और दुनिया में जगह-जगह फैले हुए यहूदियों ने एक ही जमीन को अपना मान लिया। हालांकि 1947 में यूएन ने इस जगह को दो देशों में बांट दिया और इजराइल साढ़े छह लाख लोगों के साथ एक नया देश बन गया।

देश बनने के एक साल बाद अरब देशों ने किया हमला...

अरब देश इस फैसले से ज्यादा दिन संतुष्‍ट नहीं दिखे और 1948 में मिस्र, जॉर्डन, इराक व सीरिया ने इजराइल पर हमला कर दिया। इस हमले की सबसे मजेदार बात थी कि इन देशों को मुस्लिम देशों के बीच यहूदियों का देश नागवार गुजर रहा था।

जब इजरायल ने कब्जाया जेरुसलम

इस लड़ाई में मुस्लिम देश हार तो गए ही बल्कि बंटवारे में फिलिस्तीन को मिली जमीं पर भी इजराइल ने कब्जा कर लिया। इस लड़ाई में आधा जेरुसलम शहर इजराइल के कब्जे में आ गया। जिसके बाद 7 लाख के करीब फिलिस्तीनी अरब रिफ्यूजी हो गए और उन्हें वेस्ट बैंक व गाज़ा में जगह मिली।

जब इजरायल ने कब्जाया वेस्ट बैंक और गाजा

इस हार से बौखलाए अरब देशों ने 1967 में इजराइल पर दूसरी बार हमला बोल दिया। इस बार भी फिलिस्तीन को नुकसान उठाना पड़ा और उसकी दो जगहें वेस्ट बैंक और गाजा दोनों पर इजरायल ने कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद अरब देशों ने मान लिया कि इजराइल ताकतवर देश बन गया और उससे लड़ने के लिए फिलिस्तीन को छोड़ दिया।


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