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मालदीव में बने चीनी पुल के उद्घाटन का भारत ने किया बॉयकॉट

राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के चीन के प्रति झुकाब के बाद भारत और मालदीव के संबंधों में खासा तनाव देखा जा रहा है। इस बीच भारत ने मालदीव में चीन के फ्लैगशिप इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए पुल के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (2 सितंबर): राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के चीन के प्रति झुकाब के बाद भारत और मालदीव के संबंधों में खासा तनाव देखा जा रहा है। इस बीच भारत ने मालदीव में चीन के फ्लैगशिप इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए पुल के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया। मालदीव की राजधानी माले को एयरपोर्ट आईलैंड से जोड़ने वाले पुल के उद्घाटन समारोह में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा शामिल नहीं हुए। मालदीव सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि, 'उन्हें सरकार की ओर से बुलाया गया था, लेकिन वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।' वहीं भारत की ओर से इसपर कोई टिप्पणी नहीं की गई।पुल के उद्घाटन कार्यक्रम में खुद चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी मौजूद थे। जानकारी के मुताबिक इस मौके पर मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा अन्य देशों के दूतावासों के साथ दुर्व्यवहार की भी बातें सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि आयोजन स्थल पर केवल चीनी राजदूत की कार आने की अनुमति दी गई थी। 'श्रीलंका और बांग्लादेश के राजदूतों ने इस कार्यक्रम का बॉयकॉट किया क्योंकि उनकी कारों को यमीन के सुरक्षाकर्मियों ने रोक लिया था और उनसे पैदल जाने को कहा गया।'मालदीप के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने 200 मिलियन डॉलर की लागत से बने इस पुल को उनके राजनयिक इतिहास की सबसे बड़ी कामयाबी बताया है। आपको बता दें कि मालदीव, मॉरिशस और सेशल्ज जैसे देशों को हेलिकॉप्टर, पट्रोल बोट और सैटलाइट सहयोग देना हिंद महासागर में भारत की नौसेना रणनीति का हिस्सा रहा है।


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