Blog single photo

World AIDS Day:इंसान से पहले जानवरों में मिला था एड्स, धीरे-धीरे दुनिया में फैली ये बीमारी

दुनियाभर में हर साल एचआईवी संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए 1 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे (World AIDS Day) मनाया जाता है। एड्स को अंग्रेजी भाषा में Acquired Immune Deficiency Syndrome के नाम से पहचाना जाता है।

World AIDS Day

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली, हेमंत कुमार (1 दिसंबर): दुनियाभर में हर साल एचआईवी संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए 1 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे (World AIDS Day) मनाया जाता है। एड्स को अंग्रेजी भाषा में Acquired Immune Deficiency Syndrome के नाम से पहचाना जाता है। विश्व एड्स दिवस एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने और इस बीमारी से मारे गए लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। एड्स क्यों होता, कैसे फैलता है, इसके लक्षण क्या होते हैं। ये सब अब कईयों बार सुन चुके होंगे। इसलिए आज वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर हम आपको कुछ नया बताएंगे। 

एड्स शब्द Acquired Immune Deficiency Syndrome से बना है...ये बीमारी Human immunodeficiency virus से होती है...Human immunodeficiency virus को शॉर्ट में HIV कहते हैं। HIV एक तरह का वायरस है जो इंसान के शरीर में जाकर उसके खून में मौजूद श्वेत रक्त कोशिकाओं यानी कि व्हाइट ब्लड सेल में मिल जाता है और हमारे डीएनए तक पहुंच जाता है। जिसकी वजह से हमारा इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है और धीरे-धीरे HIV हमारी व्हाइट ब्लड सेल हो खत्म कर देता है।

अब आपको व्हाइट ब्लड सेल के बारे में भी बता देते हैं। व्हाइट ब्लड सेल को हिन्दी में श्वेत रक्त कोशिकाएं कहते हैं। श्वेत रक्त कोशिकाएं हमारे शरीर की इम्यूनिटी पावर यानि रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है और हमें संक्रमण और वायरस से भी बचाती हैं लेकिन HIV होने बाद व्हाइट ब्लड सेल धीमे-धीमे नष्ट हो जाती हैं और हम बार-बार बीमार होने लगते हैं और देखते ही देखते HIV से हमें एड्स की बीमारी हो जाती है जो अभी तक लाइलाज है। एड्स होने के बाद अगर हमें कोई और बीमारी होती है तो उसका इलाज में नामुमकिन हो जाता है...कहा तो ये भी जाता है कि एड्स का मरीज एड्स के कारण नहीं मरता है बल्कि अन्य बीमारियों और संक्रमण या फिर इन दोनों की वजह उसकी मौत होती जाती है।

बता दे कि एड्स का पहला मामला 19वीं सदी की शुरुआत में जानवरों में मिला था, लेकिन अगर इंसानों की बात करें तो 1959 में अफ्रीका के कांगों शहर में एक बीमार आदमी के खून का नमूना लिया गया। कई सालों बाद डॉक्टरों को उसमें HIV का वायरस मिला और ऐसा माना गया है कि यही इंसान HIV से संक्रमित पहला व्यक्ति था। वैज्ञानिकों की मानें तो HIV चिम्पांजी से इंसानी शरीर में आया। वैज्ञानिकों के मुताबिक HIV की उत्पत्ति चिम्पांजी और SIV से हुई, SIV को सिमियन इम्यूनोडेफिशियेंसी वायरस कहते हैं। SIV भी HIV के जैसा ही वायरस है जो कि बंदरों में पाया जाता है। वैज्ञानिक ऐसा मानते हैं कि बंदरों का खून कभी किसी इंसान के संपर्क में आया और वहीं से HIV इंसानी शरीर में आया।

विश्व एड्स दिवस की शुरुआत साल 1987 से होती है। अगस्त 1987 में जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस नेटर नाम के दो इंसानों ने पहली बार एड्स डे मनाया था...जेम्स और थॉमस वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन यानि WHO में एड्स पर ग्लोबल कार्यक्रम पर काम कर रहे थे। इसके बाद साल 1988 में इन दोनों ने WHO के ग्लोबल प्रोग्राम ऑन एड्स के डायरेक्टर जोनाथन मान के सामने विश्व एड्स दिवस मनाने का सुझाव रखा। जोनाथन को World Aids Day मनाने का विचार अच्छा लगा और उन्होंने 1 दिसंबर 1988 को विश्व एड्स डे मनाने के लिए चुना और इस तरह ऑफिशियल तौर पर World Aids Day की शुरुआत 1 दिसंबर 1988 से हुई।

हिंदुस्तान में पहले एड्स केस की पुष्टि 1986 में हुई। डॉक्टर सुनीति सोलोमन ने चेन्नई की सेक्स वर्कर्स के बीच एड्स के पहले मरीजों की पहचान की। डॉक्टर सुनीति ने चेन्नई की सेक्स वर्कर महिलाओं की बस्तियों से करीब 200 ब्लड सैंपल इकट्ठे किए। उस वक्त एड्स या एचआईवी की जांच हर जगह मुमकिन नहीं थी इसलिए सैंपल को तमिलनाडु के वेल्लूर प्रयोगशाला भिजवाकर जांच करवाई तो इनमें से 6 सैंपल में एचआईवी की पुष्टि हुई। लेकिन सुनीति इस टेस्ट को निश्चित करना चाहती थीं इसलिए उन्होंने ये सैंपल अमेरिका की जॉन होपकिन्स यूनिवर्सिटी की लैब तक पहुंचवाए और वहां भी जांच में एचआईवी की पुष्टि हुई। डॉक्टर सुनीति सोलोमन की इस पहल के बाद 90 के दशक में देशव्यापी स्तर पर HIV एड्स को लेकर जागरूकता कार्यक्रम शुरू हुए।

दुनिया भर में फिलहाल 3.67 करोड़ लोग इस HIV एड्स से पीड़ित हैं, जबकि भारत लगभग 25 लाख रोगियों के साथ दुनिया में सबसे ज्यादा HIV पीड़ित मरीजों की सूची में तीसरे स्थान पर है। साल 2015 में इस बीमारी की वजह से दुनिया में 11 लाख और भारत में 68 हज़ार लोगों की मौत हुई हैं। हांलॉकि पिछले 15 सालों में एड्स के मामलों में 35% कमी आई है जो एक अच्छा साइन है। पिछले एक दशक में एड्स से हुई मौतों के मामलों में भी 42% कमी आई है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यानि UNICEF की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में लगभग 1.20 लाख बच्चे और युवा HIV संक्रमण से पीड़ित हैं हांलॉकि ये आंकड़ा साल 2017 तक का है। इन आंकड़ों के हिसाब से दक्षिण एशिया के किसी देश में HIV पीड़ित बच्चों और युवाओं की सर्वाधिक संख्या भारत में है।

2018 की इस रिपोर्ट के मुताबिक एक साल में लगभग 69 हज़ार मौतें एड्स संबंधी कारणों से हुईं हैं और तकरीबन इतने ही एड्स के नए मरीज़ भी सामने आए हैं। एड्स को लेकर इतनी सारी बातें हो ही गई हैं तो अब आपको HIV एड्स के कारण, बचाव और लक्षण भी बता ही देते हैं। सबसे पहले जानते हैं कि एड्स होता कैसे है। एड्स होने के 4-5 प्रखुख कारण हैं। पहला अनसेफ सेक्स यानि असुरक्षित यौन संबंध बना। दूसरा HIV मरीज के शरीर में इस्तेमाल किए हुए इंजेक्शन को दूसरे इंसान में इस्तेमाल करने से ये बीमारी हो सकती है। और तीसरा कारण एड्स से पीड़ित मरीज का ब्लड किसी दूसरे इंसान में चढ़ाने से HIV वायरस फैलता है। चौथा कारण की बात करें तो अगर किसी गर्भवती महिला में HIV वायरस होता है तो उससे जन्म लेने वाले बच्चे में भी ये वायरस आ सकता है। पांचवा और अंतिम कारण ये है कि अगर किसी HIV पीड़ित इंसान द्वारा इस्तेमाल किया हुआ ब्लेड इस्तेमाल करने से भी ये वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है।

इस जानलेवा बीमारी से बचने के लिए इन बिंदु का खास ध्यान रखना होगा। लेकिन इसके बीच ये भी सवाल उठता है कि इसे कैसे पहचाना जाता है कि HIV वायरस के शिकार हो चुके हैं। बुखार का रहना, नियमित रूप से शरीर में थकावट महसूस करना, सूखी खांसी होना, वजन का कम होना, स्किन, मुंह, आंखों के नीचे या नाक पर धब्बे पड़ना, समय के साथ याददाश्त कमजोर होना और शरीर में दर्द रहना। आपके किसी नजदीकी, रिश्तेदार, पड़ोसी, दोस्त या किसी भी जानने वालों में ये लक्षण दिखते हैं तो देर किए बिना तुरंत उसकी जांच कर ले। पिछले कुछ सालों के रिकॉर्ड निकालें तो ये कहा जा सकता है कि एड्स के मरीजों और मौतों बहुत हद तक कंट्रोल हुआ है। साल 2010 और 2017 के बीच नए संक्रमण में 27% की गिरावट आई और एड्स से संबंधित मौतों की संख्या में भी कमी 56% की गिरावट आई लेकिन अभी भी HIV एड्स की जकड़ से भारत मुक्त नहीं हो पाया है। इस बीमारी से भारत को मुक्त करने के लिए सरकार की कोशिशे जारी है। 

Tags :

NEXT STORY
Top