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सरदार पटेल के घर की मरम्मत के लिए दान मांगने को मजबूर गांववाले

सरदार वल्लभ भाई पटेल एक ऐसा है नाम जिसपर हर सियासी पार्टी दावा करती है। सबको लगता है कि पटेल की विरासत जिसके साथ देश के युवाओं का वोट उसके साथ, लेकिन पटेल

नई दिल्ली (3 मई): सरदार वल्लभ भाई पटेल एक ऐसा है नाम जिसपर हर सियासी पार्टी दावा करती है। सबको लगता है कि पटेल की विरासत जिसके साथ देश के युवाओं का वोट उसके साथ, लेकिन पटेल पर दावा करने वालों की आंखें खोल देने वाला खुलासा हम करने जा रहे हैं। एक तरफ सरदार पटेल के नाम पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाई जा रही है तो दूसरी तरफ उनके घर के रखरखाव के लिए गांव के लोग दान मांगने को मजबूर हैं।गुजरात के आणंद जिले के करमसद गांव में आधुनिक भारत के निर्माता कहे जाने वाले सरदार पटेल का जन्म हुआ था। आजादी के बाद 560 से ज्यादा रजवाड़ों का भारत में विलय कराकर देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले सरदार इसी मिट्टी में खेल-कूद कर बड़े हुए थे।यहीं देश के पहले गृहमंत्री का वो पैतृक घर है, जहां सरदार पटेल देशभक्ति का पहला पाठ सीखा था। यहां के हर कमरे की दीवार पर लौहपुरुष की यादें संजोई गई हैं। इन तस्वीरों को देखते वक्त हम तब हैरान रह गए। जब हमें यहां एक दान पेटी लगी नजर आई। इसके बगल में एक बोर्ड भी लगा था, जिस पर लिखा था कि यहां दी गई दानराशि मकान की मरम्मत पर खर्च की जाती है।सवाल था कि जिस सरदार पटेल की मूर्ति पर 2 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं, जिनकी विरासत पर हर सियासी दल अपना दावा कर रहा है। देश के उस लौहपुरुष के पैतृक घर के रखरखाव और मरम्मत के लिए दान मांगने की नौबत क्यों आई ?यहां हमें घनश्याम जी पटेल मिले। 80 साल के घनश्याम जी पड़ोस में रहते हैं। हमने उनसे दान पेटी लगाने की वजह पूछी। हमारी पड़ताल में पता चला कि पिछले साल ही ट्रस्ट ने अपने पैसे से इस घर का नवनिर्माण करवाया है। इस पर 75 लाख रुपए खर्च हुए। ट्रस्ट के पास इस वक्त पैसों की जबर्दस्त कमी है। बैंक में 2 करोड़ की एफडी के ब्याज से पहले कुछ खर्च निकल जाया करता था, लेकिन अब वो भी पूरा नहीं पड़ रहा। दूसरी तरफ सरकार की तरफ से भी फिलहाल मदद नहीं मिल रही। इसी वजह से यहां मंदिर और धार्मिक स्थलों की तरहदानपेटी लगानी पड़ी।करमसद में ही सरदार पटेल के छोटे भाई काशी भाई पटेल के पोते भूपेंद्र पटेल म्यूजिक स्टोर चलाते हैं। 77 साल के भूपेंद्र कहते हैं कि आज जब देश भर में सबसे ज्यादा सरदार पटेल की चर्चा हो रही है। ज्यादातर नेता उन्हीं का नाम ले रहे हैं, ऐसे वक्त में यहां के हालात सबसे बदतर हैं।सरदार पटेल का परिवार 1961 तक इस घर में रहा। बाद में इसे ट्रस्ट को को सौंप दिया गया। इसके बाद इसे म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया। यहां सरदार पटेल की दुर्लभ तस्वीरों लगाई गई हैं। जिनके उनके जीवन के बारे में हर बड़ी जानकारी मिलती है। करमसद आने वाला हर शख्स देश के पहले गृहमंत्री के पैतृक घर के दर्शन करने जरूर पहुंचता है, लेकिन यहां पहुंचकर वो तब चौंक जाता है जब उसकी नजर इस दान पेटी पर जाती है।


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