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'भारत के लिए अमेरिका ने चला ऐसा ब्रह्मास्त्र जिससे न चीन बचेगा न पाकिस्तान'

ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान और चीन संयुक्त राष्ट्र के प्रावधनों का जिम्मेदारी से पालन करें और आतंकियों को आर्थिक मदद और पनाह देना बंद करें।

न्यूज24 ब्यूरो वाशिंगटन (20 फरवरी): यह मोदी की कूटनीति का असर है कि अमेरिका ने चीन और पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए ऐसा ब्रह्मास्त्र चला है जिसके आगे चीन-पाकिस्तान को सरैंडर करना ही पड़ेगा। अमेरिकी प्रशासन के हाल ही में एक बयानस जारी करके पाक के साथ अब चीन को भी आतंकियों पनाह और को आर्थिक मदद देने का दोषी ठहरा दिया है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान और चीन संयुक्त राष्ट्र के प्रावधनों का जिम्मेदारी से पालन करें और आतंकियों को आर्थिक मदद और पनाह देना बंद करें। अमेरिकी प्रशासन ने पुलवामा हमले के बाद पहली बार इतनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका ने कहा है पुलवामा का आतंकी हमला दुनिया के सामने अब तक की सबसे भयाभय स्थिति है।

खबरों की दुनिया के विशेषज्ञों ने कहा है कि अमेरिका ने चीन को पहली बार आतंकियों को पनाह और आर्थिक मदद देने वाला देश बताया है। अमेरिकी प्रशासन के इस तरह के बयान के बाद चीन के सामने अपनी साख बचाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अभी तक पाकिस्तान को ही आतंकवाद की सेंक्चुरी माना जाता है। अब चीन को भी अमेरिका ने उसी श्रेणी में घसीट लिया है। इतना ही अमेरिका ने यह भी कहा है आतंकवाद के खिलाफ वो भारत के 'ऱाइट टू सेल्फ डिफेंस' का समर्थन करता है। इसका अभिप्राय यह भी है कि अगर भारत आतंकियों के खिलाफ क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन करता है और भारत-पाकिस्तान में युद्ध की स्थिति आती है को अमेरिका भारतका साथ देगा। 

  दरअसल, चीन पिछले कई बार मौलना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकियों की श्रेणी में डाले जाने का विरोध कर रहा है। चीन भारत के खिलाफ पाकिस्तान को समर्थन देने के लिए किसी भी स्तर पर उतर आता है। पिछली बार 2017 में मौलाना मसूद अजहर को ब्लैक लिस्टेड करने वाले प्रस्ताव के अनुमोदकों में अमेरिका भी एक देश था। ऐसा भी कहा जाता है कि संयुक्त राष्ट्र में मौलाना मसूद अजहर के प्रस्ताव का पारित न होना भारत की हार नहीं बल्कि अमेरिका और सभी मित्र देशों की हार और अपमान है। 

 बदली हुई वैश्विक परिस्थितियों में  अमेरिका भी चाहता है कि इस बार मौलाना मसूद अजहर को ब्लैक लिस्ट और पाकिस्तान पर कुछ नयी पाबंदियां लगा कर अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके। ऐसा तभी संभव है जब चीन रोड़ा न बने। इसलिए अमेरिका ने इसबार ऐसा कूटनीतिक ब्रह्मास्त्र चला है जिसके प्रहार से चीन अगर बचना चाहता है तो उसे अमेरिका की बात माननी ही होगी वरना पाकिस्तान को मदद करने के कारण उस पर टेररिस्ट सपोर्टेड नेशन का तमगा लग जायेगा। चीन इस समय खुद बहुत सी आर्थिक परेशानियों में घिरा हुआ है। अगर उसपर एक बार टेररिस्ट सपोर्टेड नेशन का तमगा लगा को बहुत सारी इंटरनेशनल सेंक्शंस का सामना करना पड़ेगा और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जायेगी और यूएसएसआर की तरह चीन को भी विखण्डन का दंश झेलना पड़ सकता है।

(PHOTOS COURTESY: GOOGLE)

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