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जानिए कैसे गरीबी से जूझकर अरोकिया राजीव बने एथलीट

गरीबी से उठकर देश के लिए कुछ करने के जुनून की वजह से अरोकिया राजीव एक एथलीट बने लेकिन कम संसाधनों के बावजूद भी उन्होंने कैसे एशियन गेम्स में परचम लहराया। छोटी जगह पैदा हुए हो या फिर घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना हो। लेकिन अगर देश का नाम रौशन करने की ठान लिया हो तो खिलाड़ी किसी भी परिस्थिति को पार कर लेते हैं। तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में पैदा हुए अरोकिया राजीव ने ये सब कर दिखाया है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (11 सितंबर): गरीबी से उठकर देश के लिए कुछ करने के जुनून की वजह से अरोकिया राजीव एक एथलीट बने लेकिन कम संसाधनों के बावजूद भी उन्होंने कैसे एशियन गेम्स में परचम लहराया।  छोटी जगह पैदा हुए हो या फिर घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना हो। लेकिन अगर देश का नाम रौशन करने की ठान लिया हो तो खिलाड़ी किसी भी परिस्थिति को पार कर लेते हैं। तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में पैदा हुए अरोकिया राजीव ने ये सब कर दिखाया है।एशियन गेम्स में 2 सिल्वर मेडल जीतने वाले राजीव के पिता ड्राइवर है और जब उन्होंने खेल की दुनिया में कदम रखा था तो उनके घर की मासिक आय मात्र 2 से 3 हजार रूपये ही थी। लेकिन राजीव ने बचपन में ही सोच लिया था कि देश के लिए कुछ करना है और इसलिए वो खेल की दुनिया में आएं।

 जब राजीव ने खेल की दुनिया में कदम रखा था तो उन्हें प्रोपर ट्रेनिंग नहीं मिली थी और इसकी वजह से उन्हें शुरूआत में उन्हें मेडल नहीं मिलते थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने आर्मी ज्वाइन किया। वैसे ही उन्हें प्रोपर ट्रेनिंग के अलावा बाकी जरूरतें भी पूरी हुई। राजीव के पिता भी किसी समय एथलीट थे और उन्हीं को देखकर राजीव ने भी खेल की दुनिया में आए। अरोकिया राजीव ने 18वें एशियन गेम्स में 2 सिल्वर मेडल जीते। पहला सिल्वर उन्हें 4 X 400 के मिक्सड रिले टीम इवेंट में मिला तो वहीं दूसरा सिल्वर मेडल 4 X 400 के पुरूष रिले टीम इवेंट में जीता।


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