VIDEO: एक डॉलर की कीमत 68.39 पर पहुंची, 15 महीने के निचले स्तर पर भारतीय रुपया

नई दिल्ली (24 मई): कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच डॉलर के मुकाबले रुपया फिर कमजोर हो गया है। एक डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत 68 रुपए 39 पैसे तक पहुंच गई है। इससे विदेशों से आयात करना महंगा होगा। रुपया क्यों कमजोर हुआ है इसकी बड़ी वजह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक बैरल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत है।79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है तो वहीं क्रूड ऑयल के इंडियन बास्केट की कीमत 77 डॉलर प्रति बैरल है। तेल की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे का सीधा असर डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत पर  हुआ है। 15 महीने में ये रुपए की सबसे कमजोर स्थिति है।दरअसल भारत अपनी जरूरत का करीब 70 फीसदी तेल आयात करता है। इसमें सबसे ज्यादा आयात ब्रेंट क्रूड ऑयल का होता है। कच्चे तेल का आयात डॉलर में करना होता है। यानी कच्चे तेल की कीमतें जितनी बढ़ेंगी। हमारे विदेशी मुद्रा भंडार से उतना ज्यादा डॉलर खर्च करना होगा। वहीं एक डॉलर के मुकाबले अगर रुपए की कीमत कमजोर पड़ती है, तो हमें ज्यादा डॉलर चुकाने होंगे।2017 - 2018 में भारत ने 87.6 अरब डॉलर के कच्चे तेल का आयात किया था। 2018 - 2019 को लेकर अनुमान जताया गया था कि इस साल भारत 105 अरब डॉलर का तेल आयात कर सकता है। लेकिन क्रूड ऑयल के इंडियन बास्केट की कीमतें 77 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद अब ये अनुमान बढ़ाना पड़ सकता है। डीजल-पेट्रोल की कीमतें पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार के भरोसे हैं..ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें जितनी ऊंची होंगी पेट्रोल--डीजल भी उतना  ही महंगा होगा।

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