विदेशी युवतियों पर चढ़ा राजस्थानी संस्कृति का खुमार, ऊंट गाड़ी से तय करेंगी 1600 किलो का सफर

केजे श्रीवत्सन, जयपुर (25 नवंबर): अंतराष्ट्रीय पुष्कर मेले में घूमने आई दो विदेशी युवतियों पर राजस्थानी संस्कृति और ग्रामीण अंचल के लोगो का प्यार इस कदर दिल मे समा गया कि उन्होंने 16 सौ किलोमीटर के रास्ते को ऊंट गाड़ी से तय करने की ठान ली। स्वीडन मूल की इन विदेशी युवतियों ने इसके लिये खुद की ऊंट गाड़ी खरीदकर तीन सप्ताह का प्रशिक्षण भी लिया है। पुष्कर से गोवा तक का सफर ये विदेशी युवतिया खुद ऊंट गाड़ी चलाकर तय करेगी जिनमे इनको करीब 2 माह का समय लगेगा।



देशी अंदाज में ऊंट गाड़ी चलाती ये विदेशी युवतिया स्वीडन की ईवा सेमसोन ओर ऐमा है जो करीब 3 माह पहले पुष्कर में आई थी। इन्होंने जब यहां एक दिन ऊंट की सवारी की तो इन्हें महसूस हुआ कि शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी ओर दूषित पर्यावरण से अलग ये अहसाह उन्हें ना केवल शांति प्रदान करेगा बल्कि उन्हें शहरों के शोरगुल से भी दूर रखेगा। तभी इन दोनों ने ठान लिया की अब वो आगे का सफर ऊंट गाड़ी पर ही तय करेगी।



 अपने इस मुकाम को पूरा करने के लिये इन विदेशी युवतियों ने स्थानीय केमल सफारी संचालक पवन नायक से 3 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण लिया । ईवा ओर ऐमा अब पुष्कर से गोवा तक का करीब 16 सौ किलोमीटर का सफर ऊंट गाड़ी पर डेजर्ट ओर लोकल लोगो से मुलाकात करते हुए तय करेगी।





ऐमा ओर ईवा ने बताया कि शहरों के शोरगुल से अलग ये शांति प्रदान करने वाली यात्रा होगी और इससे पर्यावरण प्रदूषण को भी बचाया जा सकता है। विदेशी युवतियों ने कहा कि उन्होंने ऊंट गाड़ी को चलाने , ऊंट को खोलने ओर वापस जोतने सहित उनके खाने पीने की सभी व्यवस्थाओ को सिख लिया है। उनका यह भी कहना है कि उन्हें ग्रामीण अंचल के साधारण लोगों से इस यात्रा के जरिये मिलने का मौका मिलेगा।