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राफेल मामले में नया खुलासा, बीजेपी सांसद ने कहा- देखी थी कैग की रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट से राफेल मामले में बीजेपी को क्लीन चिट मिलने के बाद कांग्रेस हमलावर हो गई है। कांग्रेस का आरोप हैं कि कैग की रिपोर्ट पीएसी के सामने नहीं रखी गई। इस मामले में अब बिहार के

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (15 दिसंबर): सुप्रीम कोर्ट से राफेल मामले में बीजेपी को क्लीन चिट मिलने के बाद कांग्रेस हमलावर हो गई है। कांग्रेस का आरोप हैं कि कैग की रिपोर्ट पीएसी के सामने नहीं रखी गई। इस मामले में अब बिहार के महराजगंज से बीजेपी सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने एक नया खुलासा किया है। उन्होंने राफेल पर सीएजी रिपोर्ट पीएसी के सामने ना रखने के विपक्ष के आरोपों को गलत बताया है।

जनार्दन सिंह भी पीएसी के सदस्य भी हैं। उन्होंने कहा कि मैंने कैग की रिपोर्ट देखी थी और उसमें राफेल की कीमत को लेकर भी बातें साफ थीं। हालांकि उन बातों को सार्वजनिक करना ठीक नहीं है। उन्होंने इस बारे में कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उनपर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। हालांकि पीएमसी के अध्यक्ष मल्लिकाअर्जुन खड़के कह चुके हैं कि कैग ने जब रिपोर्ट सौंपी ही नहीं हो तो उसे पीएसी ने कैसे देख लिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले में साफ अंगित किया गया है कि सीएजी ने पीएसी के सामने राफेल डील रिपोर्ट को पेश किया और इसपर किसी भी तरह की चिंता नहीं जताई गई।

वैसे इस मामले में अभी भी पेंच फंसा हुआ है, क्योंकि एनडीए के सहयोगी दल अकाली के सांसद और पीएसी सदस्य प्रेम सिंह चंदू माजरा ने न्यूज़ 24 से खास बातचीत में उन्होंने साफ-साफ कहा है कि राफेल से संबंधित कोई भी रिपोर्ट पीएसी के पास नहीं आई है।

कांग्रेस को मिला स्वामी का साथ

सुब्रामण्यम स्वामी का यह बयान मोदी सरकार के लिए परेशानी भी खड़ी कर सकता है। हालाांकि उन्होंने यह भी कहा है कि अगर मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस को लगता है कि मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया है और गलत जानकारी दी है तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करना चाहिए या रिव्यू पेटीशन दायर करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर PAC चेयरमैन मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि सीएजी की रिपोर्ट नहीं मिली है तो हमें उनकी बात को गंभीरता से लेना चाहिए। वैसे आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में राफेल मामला को लेकर कांग्रेस नहीं बल्कि प्रशांत भूषण, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी  गए थे। ऐसे में अब यह देखना होगा कि वाकई में कांग्रेस इस मामले में फिर से सुप्रीम कोर्ट जाएगी या नहीं।

मल्लिकार्जुन ने कहा, नहीं मिली रिपोर्ट

मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि बीजेपी इस मामले पर देश से माफी मांगे, क्योंकि फैसले में सीएजी की रिपोर्ट के बारे में जो बातें कहीं गई है, वह पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि मैं पीएसी के सभी सदस्यों को लिखूंगा की एटॉर्नी जनरल को बुलाया जाए, और हम कैग से भी पूछना चाहते हैं कि उन्होंने यह रिपोर्ट संसद के पटल या पीएसी के सामने कब रखी। हालांकि इस मामले में सरकार की तरफ से यह कहा गया है कि उसने सही जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है और फैसला सुनाते समय हो सकता है कि कोर्ट में टाइपिंग एरर कर दिया जो, जिसमें यह बात सामने आई है।

राहुल ने बीजेपी पर लगाया झूठ बोलने का आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में मोदी सरकार को बड़ी राहत देते हुए किसी तरह की जांच का आदेश देने से मना कर दिया। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने मामले से जुड़े तीन पहलुओं पर सुनवाई करने के बाद सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी ने इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर सियासी फायदे के लिए झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की। जवाब में राहुल ने ये साफ कर दिया कि वो अपने पहले के रुख पर कायम हैं। राहुल गांधी ने कहा कि जजमेंट में ये जिक्र किया गया है कि राफेल की कीमत का विस्तृत ब्योरा जो सीएजी की रिपोर्ट में लिखा गया है, वो रिपोर्ट पीएसी से साझा की गई, लेकिन उनके मुताबिक जब इसकी जानकारी पीएसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को ही नहीं है तो फिर जजमेंट में ये बात कहां से आई ? कांग्रेस के मुताबिक राफेल पर सीएजी की रिपोर्ट पीएसी यानी पब्लिक एकाउंट्स कमिटि से तो कभी शेयर ही नहीं की गई। पीएसी के सदस्य प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने भी इस पर हामी भरी है। खास बात ये है कि प्रेम सिंह चंदूमाजरा उसी अकाली दल के सांसद हैं जो एनडीए का हिस्सा है। विपक्ष अब ये सवाल उठा रहा है कि क्या सरकार ने कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में गलत जानकारी दी, जिसके आधार पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। अब सरकार को देश से माफी मांगनी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट में उसने जो जानकारी दी है, उसे भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

दरअसल सीएजी के रिपोर्ट पेश करने के बाद सरकार उसे संसद के पटल पर रखने के लिए वक्त तय करती है। संसद के पटल पर रखे जाने के बाद वो रिपोर्ट पीएसी के पास भेजी जाती है। कांग्रेस के मुताबिक राफेल के मामले में ऐसा हुआ ही नहीं है, लिहाजा वो राफेल डील के मुद्दे पर पहले से ज्यादा तीखे अंदाज में नजर आ रही है। खबरों के मुताबिक सीएजी राफेल की रिपोर्ट जनवरी अंत तक सरकार को सौंप सकता है। बहरहाल लड़ाकू विमान राफेल डील के मुद्दे पर सरकार और कांग्रेस के तेवरों से यही संकेत मिल रहे हैं कि अभी इस पर सियासी तकरार और तेज होगी।


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