मोदी सरकार ने किया राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता: चिदंबरम

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (18 जनवरी): पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने एनडीए सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया है। चिदंबरम ने सवाल किया कि जब देश को 126 लड़ाकू विमानों की जरूरत थी तो सरकार सिर्फ 36 राफेल ही क्यों खरीद रही है। उन्होंने एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने 36 विमान ही क्यों खरीदे। सरकार ने वायुसेना की 126 विमानों की शख्त जरूरत को नकार कर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया है।

आपको बता दें कि एक अंग्रेजी अखबार ने दावा किया है कि एनडीए सरकार के एक फैसले से राफेल विमान के दाम करीब 41 फीसदी बढ़ गए। अखबार का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 126 विमानों की बजाए 36 राफेल विमान खरीदने के फैसले से पूरी तरह से तैयार विमान के दाम बढ़ गए। दरअसल एनडीए सरकार ने भारतीय जरूरतों के मुताबिक 13 विशेष पार्ट्स के डिजाइन और विकास के लिए 1.3 बिलियन यूरो के दाम पर सहमति दी। डिजाइन और विकास के इस दाम को 126 विमानों की बजाए 36 में बांटने के कारण प्रति विमान का दाम बढ़ गया। अखबार के लेख में 2007, 2011 और 2016 के दामों की तुलना करते हुए बताया गया कि एक ही तरह के साजो-सामान वाले राफेल के दाम किस तरह बढ़ते चले गए।

2007 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में दसॉ एविएशन को 126 विमान की आपूर्ति के लिए चुना गया, उस वक्त एक बेस विमान की कीमत 79.3 मिलियन यूरो थी। 2011 में प्रति विमान की कीमत बढ़कर 100.85 मिलियम यूरो हो गई। साल 2016 में एनडीए सरकार ने प्रांस सरकार से 36 विमानों को 2011 की से 9 फीसदी कम दाम पर यानी 91.75 मिलियन यूरो में खरीदने का करार किया।

हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। दसॉ ने भारत में बनने वाले 13 विशेष पार्ट्स के डिजाइन और विकास के लिए 1.4 बिलियन यूरो का दाम मांगा। हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के रूप में ये अतिरिक्त क्षमता वायुसेना ने मांगी थीं। बातचीत में ये दाम 1.3 बिलियन यूरो पर तय किए गए। इसका मतलब डिजाइन और विकास के लिए तय किए गए ये दाम अब 36 राफेल विमानों में बांटे गए, जिससे प्रति विमानों के दाम 2007 के 11.11 मिलियन यूरो से बढ़कर 36.11 मिलियन यूरो तक पहुंच गए। यह एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में बताया गया है।