Blog single photo

नहीं सुधार रहे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के हालात

रकार और रिजर्व बैंक के लाख कोशिशों के बावजूद सरकारी क्षेत्र के बैंकों के हालात में सुधार होते नहीं दिख रहे हैं। बैंकों के एनपीए में लगातार बढ़ोतरी हो रहा है।

नई दिल्ली (13 मई): सरकार और रिजर्व बैंक के लाख कोशिशों के बावजूद सरकारी क्षेत्र के बैंकों के हालात में सुधार होते नहीं दिख रहे हैं। बैंकों के एनपीए में लगातार बढ़ोतरी हो रहा है। ताजा आंकड़े के मुताबिक जनवरी-मार्च के तिमाही में चार सरकारी बैंकों को कुल 11,729 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। . सरकारी बैंकों के एनपीए में साल 2013 से साल 2017 तक इसमें 311 फीसदी तक का इजाफा हुआ है और ये 1.55 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर साढ़े छह लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस मामले में निजी बैंक भी पीछे नहीं है। 2013 के 19,986 करोड़ रुपये के मुक़ाबले 2017 में निजी बैंकों का एनपीए 73,842 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।इलाहाबाद बैंक को वित्त वर्ष 2017-18 की 31 मार्च 2018 को समाप्त तिमाही में एकल आधार पर 3,509.63 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, वहीं यूको बैंक का घाटा बढ़कर 2,134.36 करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा चौथी तिमाही में केनरा बैंक को 4,860 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ तो देना बैंक को इसी अवधि में 1,225.42 करोड़ रुपये घाटा हुआ।पूरे वित्त वर्ष 2017-18 में बैंक का शुद्ध घाटा 5,871.74 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान उसकी कुल आय 20,181.25 करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2016-17 में यह आंकड़े क्रमश: 1,094.07 करोड़ रुपये और 21,187.85 करोड़ रुपये थे।


Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 and Download our - News24 Android App . Follow News24online.com on Twitter, YouTube, Instagram, Facebook, Telegram .

Tags :

Top