कश्मीर पर पाकिस्तान फेल - अब कर रहा ब्लैकमेल

संजीव त्रिवेदी, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14 अगस्त): भारतीय संसद द्वारा धारा 370 को खत्म करने और राज्य के पुनर्गठन के फैसले को 9 दिन बीत गए लेकिन मुहावरे के अंदाज में कहें तो मसले पर भारत के खिलाफ पाकिस्तान का प्रौपगैंडा अढ़ाई कोस भी नहीं चल पाया ।

प्रयास तो खूब किया : ऐसा नहीं कि पाकिस्तान ने प्रयास नहीं किया लेकिन भरोसा किसी का नहीं जीत पाए । मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय कलेवर देने के लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी दुनिया के देशों में घूमे लेकिन किसी ने कोई भाव नहीं दिया । ईमरान खान ने कई देशों के प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों से भारत की शिकायत की लेकिन उन्हें कोई आश्वासन नहीं मिला । पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर के सवाल पर संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा भी खटखटाया गया लेकिन वहीं भी बात नहीं बनी । खीज कर शाह महमूद कुरैशी ने ईद के रोज पाक अधिकृत कश्मीर के मुज्जफराबाद में कह दिया कि 'संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के लिए कोई फूलों का हार लेकर नहीं खड़ा है' । ये खीज तब जब पाकिस्तानी विदेश मंत्री मुज्जफराबाद, त्यौहार के मौके पर लोगों का हौसला बढ़ाने गए थे ।

कश्मीर पर पाकिस्तान की पैंतरेबाजी अब दुनिया के देशों के समझ में आने लगी है । कश्मीर में हालात अभी सामान्य नहीं लेकिन दुनियाभर में ये भी देखा गया कि कैसे वहां ईद का त्यौहार शांतिपूर्ण तरीके से बीता और कैसे बीते 9 दिनो में राज्य के किसी भी भाग से किसी भी तरह की अप्रिय घटना का कोई समाचार नहीं मिला । दुनिया के अधिकतर देश ये मानते हैं कि कश्मीर पर संसद का फैसला भारत का आंतरिक मामला है जिसमें किसी भी देश के दखल की कोई जरूरत नहीं ।

दुनियाभर से मिले सिर्फ झटके : पाकिस्तान को सबसे तगड़ा झटका संयुक्त राष्ट्र ने दिया । संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा अध्यक्ष पोलेंड ने पाकिस्तान की दलीलों के जवाब में कहा कि कश्मीर दो देशों के बीच का मसला है जिसका फैसला दोनो देशों को ही लेना है - संयुक्त राष्ट्र को नहीं । कभी मध्यस्थता की बात करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी अब पीछे हट चुके हैं । अमेरिका में भारत के राजदूत हर्षवर्धन श्रिंगला ने कहा अमेरिका भी कश्मीर मसले पर किसी देश के दखल की जरूरत नहीं समझता । वहीं रूस ने कहा भारत सरकार के फैसले भारतीय संविधान के अनुरूप लिए गये हैं जबकि बीजिंग जाकर विदेश मंत्री जयशंकर ने चीन को आश्वस्त कर दिया कि कश्मीर पर भारत सरकार के फैसले - चीन के साथ भारत की सीमारेखा एलएसी को प्रभावित नहीं करेंगे । कहीं कोई राहत नहीं मिलते देख अब पाकिस्तान ब्लैकमेल पर उतर आया है ।

ब्लैकमेल से क्या बनेगी बात: अफगान शांति वार्ता में अफगान तालिबान सबसे अहम है और उसे शांतिवार्ता के लिए तैयार करने में अमेरिका को पाकिस्तान की जरूरत है । ऐसा इसलिए कि अफगान तालिबान पाक सेना और आईएसआई के नियंत्रण में है । पाकिस्तान ने अब इसी का फायदा उठाने की ठान ली है । अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार न्यू यार्क टाइम्स को एक इंटरव्यू में अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत असद माजिद ने कहा - अगर कश्मीर में हालात बिगड़े तो पाकिस्तान को अपनी सेना अफगान बार्डर से हटाकर भारत के बार्डर पर लगानी होगी । ऐसा कहकर पाकिस्तान दरअसल अमेरिका को संदेश दे रहा है । संदेश ये कि अगर अमेरिका ने पाक की मदद नहीं की तो फिर अफगान शांति वार्ता से पाकिस्तान अपना हाथ खींच लेगा और वार्ता फेल हो जाएगी ।

अमेरिकी फौजों की अफगानिस्तान से वापसी के लिए इस वार्ता का अपने अंजाम तक पहुंचना ज़रूरी है और पिछले दिनो कतर में तालिबान से आठवीं दौर की बातचीत के बाद अमेरिकी वार्ताकार जालमें खलीलजाद मशवरे के लिए अमेरिका वापस पहुंच चुके हैं । ऐसे में अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत माजिद के बयान को - कहीं पे निगाहें और कहीं पे निशाना लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है । लेकिन आर्थिक रूप से लड़खड़ाए पाकिस्तान को अभी अमेरिका की बहुत ज़रूरत है लिहाजा इस तरह का बलैकमेल अमेरिका पर कोई असर नहीं डाल रहा ।

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