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हर स्त्री के होते हैं 'चार पति' और आपका नंबर होता है चौथा

नई दिल्ली (3 मई): शायद आपको यह खबर थोड़ी अजीब जरूर लगेगी, लेकिन यह सौ फीसदी सच है। शायद आप अपनी पत्नी से भी कई सवाल करेंगे, पर आपकी पत्नी भी कहेगी कि वो आपकी पहली पत्नी है। अब आप सोच रहे होंगे कि जब हम दोनों की पहली शादी हुई है और मेरी पत्नी से मेरी पहली शादी हुई है तो मैं अपनी पत्नी का चौथा पति कैसे हुआ तो इस बारे में बताने जा रहे हैं।

हर स्त्री के चार पति होते हैं और आपका नंबर चौथा होता है। यह बात आप इसलिए नहीं जान पाते हैं क्योंकि शादी के समय आपका ध्यान तो रिश्तेदारों से मिलने पर रहता है। अगर आप शादी के समय पंडित के मंत्रों को सही तरीके से जानेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि शादी के समय जब आप मंडप में बैठे होते हैं तो दूल्हे के तौर पर आपका नंबर चौथा होता है।

आप से पहले किसी भी दुल्हन का स्वामित्व तीन लोगों को सौंपा जाता है। विवाह के समय जब पंडित आपको विवाह का मंत्र पढ़ा रहा होता है तब आप मंत्र का मतलब नहीं समझते हैं। असल में वैदिक परंपरा में नियम है कि स्त्री अपनी इच्छा से चार लोगों को पति बना सकती है। इस नियम को बनाए रखते हुए स्त्री को पतिव्रत की मर्यादा में रखने के लिए विवाह के समय ही स्त्री का संकेतिक विवाह तीन देवताओं से करा दिया जाता है।

इसमें सबसे पहले किसी भी दूल्हन (कन्या) का पहला अधिकार चन्द्रमा को सौंपा जाता है, इसके बाद विश्वावसु नाम के गंधर्व को और तीसरे नंबर पर अग्नि को और अंत में उसके पति को सौंपा जाता है। इसी ही वैदिक परंपरा के कारण ही द्रौपदी एक से अधिक पतियों के साथ रही थी।


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