News

क्या आपको फेसबुक के 'सीक्रेट फोल्डर' का पता है? नहीं तो मिस करते हैं कई ज़रूरी मैसेज

नई दिल्ली (8 अप्रैल) : क्या आप फेसबुक के एक सीक्रेट फोल्डर के बारे में जानते हैं। इस सीक्रेट फोल्डर का नाम है- 'मैसेज रिक्वेस्ट्स'। कुछ महीने पहले फेसबुक ने अवांछित मैसेजेस के लिए दी गई दूसरे इनबॉक्स की सुविधा को खत्म कर दिया था। मैसेजिंग सर्विस में फेसबुक ने इसे 'मैसेज रिक्वेस्ट्स'  से बदल दिया था। इसके ज़रिए आप ऐसे लोगों के मैसेज, जो आपके फेसबुक फ्रैंड्स नहीं हैं, की अनदेखी कर सकते हैं। आपको एक नोटिफिकेशन मिलता है जब कोई अपरिचित आपको फेसबुक के मैसेजिंग एप 'मैसेंजर'  के जरिए पिंग करता है।    

कॉस्मोपॉलिटन की रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह की नोटिफिकेशंस को फेसबुक फिल्टर करता है। ऐसे में आपको हर उस व्यक्ति का संदेश नहीं दिखता जो आपसे संपर्क करना चाहता है। ये इसलिए है कि फेसबुक स्पैम मैसेज और अपशब्दों वाले मैसेज की संख्या कम से कम रखना चाहता है। लेकिन ऐसे में इस बात की भी संभावना है कि आप से संपर्क करने वाले कुछ लोगों के जायज़ संदेश भी फिल्टर हो जाएं और आप तक ना पहुंचे। ऐसे में ये मैसेज उसी सीक्रेट फोल्डर में जाते हैं।

कैसे पहुंचे इस सीक्रेट फोल्डर तक? फेसबुक मैसेंजर में इस सीक्रेट फोल्डर को ढूंढना बहुत आसान है। इसके लिए आप सबसे पहले अपने मैसेंजर एप में जाएं। इसके बाद Settings आईकन पर क्लिक करें। इसके बाद आपको People लिखा हुआ दिखेगा जिस पर क्लिक करें। इसके बाद आपके सामने Message Requests लिख कर आएगा, उसे भी क्लिक करें। इसके बाद स्क्रीन को नीचे तक स्क्रॉल करें और See filtered requests वाले ऑप्शन पर क्लिक करें। वैसे इस फोल्डर में जो मैसेज होते हैं वो फालतू के ही होते हैं। लेकिन इसी बीच कई बार काम के मैसेज भी आ जाते हैं जिनमें आप पढ़ कर रिप्लाई कर सकते हैं। बता दें कि फेसबुक मैसेंजर में पहले यह फोल्डर other के नाम से था जिसके जरिए आप कुछ रिक्वेस्ट जोड़ या हटा सकते थे। इसमें मैसेज भेजने वाले को पता भी नहीं चलता था कि आपने संदेश पढ़ा या नहीं। लेकिन फेसबुक ने पिछले साल इसे हटा दिया।

 


Related Story

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 and Download our - News24 Android App . Follow News24online.com on Twitter, YouTube, Instagram, Facebook, Telegram , Google समाचार.

Tags :

Top