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कश्मीर: मोदी सरकार का बड़ा फैसला, यासीन मलिक के JKLF को किया बैन

केंद्र सरकार ने यासीन मलिक के नेतृत्व वाले दल जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) पर प्रतिबंध लगा दिया है। जेकेएलएफ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का हिस्सा है। इससे पहले केंद्र सरकार ने बीते 1 मार्च को जम्मू-कश्मीर के संगठन जमात-ए-इस्लामी पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया था कि इस संगठन का संबंध आतंकी संगठनों के साथ रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने एक आदेश में जमात-ए-इस्लामी को गैरकानूनी संगठन बताते हुए उसपर बैन लगाया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि जमात-ए-इस्लामी, जम्मू कश्मीर के आतंकी संगठनों के साथ नजदीकी संबंध रहे हैं। इतना ही नहीं यह संगठन जम्मू-कश्मीर के अतिरिक्त दूसरी जगहों पर भी चरमपंथियों और आतंकियों की मदद करती रही है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 मार्च): केंद्र सरकार ने यासीन मलिक के नेतृत्व वाले दल जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) पर प्रतिबंध लगा दिया है। जेकेएलएफ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का हिस्सा है। इससे पहले केंद्र सरकार ने बीते 1 मार्च को जम्मू-कश्मीर के संगठन जमात-ए-इस्लामी पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया था कि इस संगठन का संबंध आतंकी संगठनों के साथ रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने एक आदेश में जमात-ए-इस्लामी को गैरकानूनी संगठन बताते हुए उसपर बैन लगाया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि जमात-ए-इस्लामी, जम्मू कश्मीर के आतंकी संगठनों के साथ नजदीकी संबंध रहे हैं। इतना ही नहीं यह संगठन जम्मू-कश्मीर के अतिरिक्त दूसरी जगहों पर भी चरमपंथियों और आतंकियों की मदद करती रही है। 

गृह सचिव ने दी जानकारी केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा ने बताया कि केंद्र सरकार ने आज (शुक्रवार) गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 के तहत जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट को गैरकानूनी असोसिएशन घोषित किया। यह कदम सरकार के द्वारा आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत उठाया गया।अलगाववादी विचारधारा को हवा दी, 37 से ज्यादा केस गृह सचिव ने आगे कहा कि यासीन मलिक के नेतृत्व वाले जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ने घाटी में अलगाववादी विचारधारा को जन्म दिया और यह 1988 से हिंसा और अलगाववादी गतिविधियों में सबसे आगे रहा है। राजीव गौबा ने बताया कि जम्मू और कश्मीर पुलिस के द्वारा JKLF के खिलाफ 37 एफआईआर दर्ज की गई हैं। सीबीआई ने भी दो केस दर्ज किए जिसमें से एक IAF जवान की हत्या का मामला भी शामिल है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने भी एक केस दर्ज किया है, जिसकी जांच जारी है।  

सुरक्षा वापस लेने पर भी बोले गृह सचिव इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में अलगाववादी नेताओं को स्टेट के द्वारा सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। इसकी समीक्षा करने के बाद ऐसे कई लोगों की सिक्यॉरिटी वापस ले ली गई और समीक्षा की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।  


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