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यहां एक साथ लगते हैं नारे 'या अली, जय बजरंग बली'

नई दिल्ली (1 जून): 'या अली, जय बजरंग वली'...ऐसे नारों से समाज बनता है, बंधता है एक दूसरे से...वो पांच वक्त की नमाज भी पढता है और बड़े मंगल पर हनुमान जी का भण्डारा भी करता है। वो रोजे भी रखता है और हनुमान जयंती भी पूरी श्रद्धा से मनाता है। वो हनुमान को शिव का स्वरूप और अली को हनुमान में देखता है। जी, हां उसका नाम सैयद कैसर रज़ा है। वो लखनऊ का रहने वाला है और  भारत की गगा-जमुनी संस्कृति का संवाहक है।

पेशे से सरकारी कर्मचारी कैसर हनुमान मंदिर जाने नियमित श्रद्धालुओं में से एक है। कैसर का कहना हनुमानजी किसी एक धर्म या संप्रदाय के नहीं हैं। ईश्वर कभी धर्म या संप्रदाय देख कर कृपा, दया और आशीर्वाद नहीं देते। ये तो हम लोगों का भ्रम है। कैसर कहते हैं कि उनके परिवार में सालोंसाल से लखनऊ के बडा़ मंगल मंदिर के भण्डारे को जीमने की प्रथा है। हम तो बचपन से यहां आते हैं।

कैसर कहते हैं कि जब हम भण्डारा लगाते हैं तो सभी धर्म-संप्रदाय और समदायों के लोग बिना भेदभाव एक साथ छकते हैं। कैसर बताते हैं कि उनके जैसे कई और भी मुस्लिम परिवार हैं जौ ईद-रमजान की तरह होली और दीवाली भी पूरी शिद्दत के साथ मनाते हैं। वो कहते हैं हम हुनुमान जी प्रार्थना करते हैं कि पूरे भारत हिंदु-मुसलमानों के बीच ऐसा ही माहौल कायम हो जाये।


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