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अमेरिका ने भारत को दिया नाटो देश जैसा दर्जा, रक्षा सौदों में मिलेगी मदद

अमेरिकी सीनेट ने रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक कानून पारित किया है, जिससे भारत का दर्जा अमेरिका के नाटो सहयोगियों और इजराइल एवं दक्षिण कोरिया जैसे देशों के समान हो जाएगा।

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(3 जुलाई): अमेरिकी सीनेट ने रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक कानून पारित कर दिया है, जिससे भारत का दर्जा अमेरिका के नाटो सहयोगियों और इजराइल एवं दक्षिण कोरिया जैसे देशों के समान हो जाएगा। वित्त वर्ष 2020 के लिए पिछले सप्ताह पारित राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम में इस तरह का प्रस्ताव निहित था।सीनेट इंडिया कॉकस के सह अध्यक्ष सांसद मार्क वार्नर के समर्थन से सीनेट इंडिया कॉकस के सह अध्यक्ष सांसद जॉन कॉर्निन द्वारा पेश किए गए संशोधन में मानवीय मदद, आतंकवाद, जल-दस्युओं से निपटने और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में हिंद महासागर में भारत -अमेरिका रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है।

 पिछले सप्ताह हाउस इंडिया कॉकस के सह अध्यक्ष ब्रैड शर्मन ने कांग्रेस सांसद जोए विलसन, अमी बेरा, टेड योहो, जॉर्ज होल्डिंग, एड केस और राजा कृष्णमूर्ति के साथ ऐसा ही कानूनी प्रस्ताव 'हाउस एफवाई 2020 एनडीएए' पेश किया गया था,  जिससे भारत-अमेरिका संबंधों को और बढ़ावा मिलेगा।अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों (प्रतिनिधि सभा एवं सीनेट) द्वारा पारित किए जाने के बाद यह विधेयक हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाएगा। सदन द्वारा एनडीएए के इस संस्करण को जुलाई में किसी समय पेश करने की संभावना है, क्योंकि अगस्त में एक महीने के अवकाश के लिए 29 जुलाई को सदन स्थगित कर दिया जाएगा। भारत-अमेरिका सामरिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने एक बयान में सीनेटर कॉर्निन और वार्नर की प्रशंसा की है।

भारत को भी नाटो देशों की तरह मिलेगा तकनीक का लाभ

वर्तमान में भारत, अमेरिका का गैर नाटो सहयोगी है। यह दर्जा मिलने के बाद जापान और आस्ट्रेलिया जैसे अन्य नाटो सहयोगियों की तरह भारत को भी शीर्ष रंग टेक्नोलाजी तक पहुंच मिल जाएगा। लेकिन भारत पहले से ही अमेरिका का बड़ा रक्षा साझीदार है और उसे अत्याधुनिक तकनीक तक पहुंच हासिल है।

इससे कोई बड़ा अंतर नहीं आएगा, लेकिन सीनेट एक शक्तिशाली निकाय है, इसलिए भारत-अमेरिका साझीदारी के पक्ष में विश्वास मत एक महत्वपूर्ण कदम है। पूर्व विदेश सचिव ललित मानसिंह ने कहा कि इस कदम का स्वागत किया जाना चाहिए।


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