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नोटबंदी का 50वां दिन- कैश की किल्लत बढ़ने वाली है! जानिए क्यों...

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (28 दिसंबर): नोटबंदी के 50 दिन बाद भी देश कैश की कमी से जूझ रहा है। देश में अभी भी कैश के लिए कोहराम मचा हुआ है। बैंक और एटीएम के बाहर पैसे निकालने कि लिए लोग अभी भी लंबी लाइनों में खड़े हैं। केंद्र सरकार और RBI नकदी की किल्लत को दूर करने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू कर चुके हैं। देश की चारों करेंसी प्रिंटिंग प्रेस दिन-रात 24 घंटे काम कर रही हैं। 2000 और 500 के नए नोटों की तेजी से छपाई की जा रही है। ऐसे में प्रिंटिंग प्रेस में काम कर रहे कर्मचारियों की दिक्कतें बड़ गई है। उन्हें 12-12 घंटे की शिफ्ट में काम करना पड़ रहा है, कारण कई कर्मचारी बीमार पड़ गए हैं। इससे परेशान होकर पश्चिम बंगाल की सालबोनी स्थिति प्रिंटिंग प्रेस में कर्मचारियों ने ओवरटाइम करने से मना कर दिया है। खबर है कि भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राईवेट लिमिटेड (BRBNMPL) कर्मचारी संघ ने RBI अधिकारियों को एक नोटिस जारी कर कहा है कि मंगलवार से कर्मचारियों ने नौ घंटे से ज्यादा की शिफ्ट में काम करने से इनकार कर दिया है।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद और संघ के अध्यक्ष शिशिर अधिकारी ने कहा कि मैसूर और सालबोनी की मुद्रा प्रिंटिंग प्रेस में कार्यरत कई कर्मचारी बीमार पड़ गए हैं। 14 दिसंबर से अधिकारियों द्वारा सभी कर्मचारियों से 12 घंटे की शिफ्ट में मजबूरन काम कराया गया ताकि 100 और 500 रुपये की मांग को पूरा किया जा सके। सालबोनी प्रिंटिंग प्रेस में रोजाना 9.6 करोड़ नोट छापे जाते हैं। जिसके लिए यहां काम करने वाले कर्मचारियों को दो शिफ्टों में 12-12 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ती है। एसोसिएशन के अध्यक्ष नेपाल सिंह ने बताया 9 घंटे की शिफ्ट में 3.4 करोड़ नोट प्रिंट होते हैं, जबकि 2 शिफ्ट्स में 6.8 करोड़ नोट प्रिंट्स होते हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के लगातार काम करते रहने से उनके परिवार पर भी इसका उल्टा असर पड़ रहा है। लोगों के पारिवारिक व सामाजिक काम-काज प्रभावित हो रहे हैं।

2000 के मुकाबले 500 के नोट छापने की रफ्तार की दोगुनी- RBI ने 500 रुपये के नोटों की प्रिंटिंग को बढ़ाकर डबल कर दिया गया है। सरकारी प्रेस नासिक और देवास में 500 रुपए के नोटों की छपाई होती है। अब नासिक और सालबोनी के करेंसी प्रेस नोट में 500 रुपए के नए नोटों की छपाई दोगुनी कर दी गई है। अब यहां रोजाना करीब 80 लाख 500 रुपए के नए नोटों की छपाई हो रही है। इन नोटों का मूल्य 400 करोड़ रुपए है। नोट बैन के पहले सिस्टम में चल रहे है 14 लाख करोड़ रुपए की वैल्यू वाली करंसी में 500 रुपए के नोट की करीब 50 फीसदी हिस्सेदारी थी। यानी 500 रुपए के नोट की वैल्यू करीब 8 लाख करोड़ थी। इस समय अचानक में इतनी वैल्यू वाली करंसी बाजार में नहीं है। जिसकी वजह से लोगों के पास 100 रुपए के बाद सीधे 2000 रुपए के ही नोट मिल रहे है। इस कारण लेन-देन खरीद में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

कैसे छपते हैं नोट...

- 2000 रुपए के नोट भारतीय रिजर्व बैंक की मैसूर प्रेस में छप रहे हैं।

- जबकि 500 रुपए वाले नए नोट नासिक और देवास(एमपी)में छप रहे हैं।

- नासिक और देवास, दोनों प्रिंटिंग प्रेस भारत सरकार द्वारा संचालित है।

- इन तीन के अलावा चौथा प्रिंटिंग प्रेस पश्चिम बंगाल के साल्बोनी में है।

- जिसपर RBI का नियंत्रण है यहां 100, 500 और 2000 के नोट छप रहे हैं।

- 500 रुपए के प्रत्येक नोट की छपाई के लिए 3.09 रुपए का खर्चा आ रहा है।

- 2000 रुपए के प्रत्येक नोट की छपाई के लिए 3.54 रुपए का खर्चा आ रहा है।

कितना पैसा आ चुका है अभी तक...

- देश भर में कुल 2 लाख 20 ATM मशीने हैं, गांव/कस्बों में 36 हजार मशीने हैं।

- ATMs में कैश डालने के लिए 40 हजार लोग और 8800 गाडियां लगी हुई हैं।

- एक ATM मशीने में आमतौर पर चार Boxes होते हैं जिन्हें तकनीकी भाषा में कैसेट कहा जाता है।

- हर Boxes या कैसेट की कैपेसिटी दो हजार नोट (20 गड्डियां) रखने की होती है।

- जब 500 और 1000 के नोट चलते थे तब इनमें 52 लाख रुपए तक रखे जा सकते थे।

- नोटबंदी के बाद ATM के कैसेट बदलने में एजेंसियों को करीब 35 दिन का समय लगा।

- कैसेट बदलने के बाद भी नए रुपयों की कमी के कारण ज्यादातर एटीएम खाली पड़े हैं।

- RBI ने 10 नवंबर से 19 दिसंबर तक कुल 22.6 अरब नोट जारी किए गए।

- इनमें 20.4 अरब नोट 10, 20, 50 और 100 रुपये के नोट जारी किए गए।

- जबकि 2.2 अरब नोट 2,000 रुपये और 500 रुपये के जारी किए गए।

- RBI ने जितने नोट जारी किए उनकी कुल कीमत 5.92 लाख करोड़ हैं।

- 19 दिसंबर तक 5 लाख 92 हजार 613 करोड़ रुपये लोगों को दिए गए।

- 10 दिसंबर तक 4 लाख 61 हजार करोड़ रुपये बांटे गए थे।

- यानी 9 दिनों में 1 लाख 31 हजार 613 करोड़ रुपये बांटे गए हैं।

- एक दिन का हिसाब देखा जाए तो 15 हजार 24 करोड़ रुपये हुआ।

- औसतन रोज देश के एटीएम में करीब 8000 करोड़ की जरूरत होती है।

- यानि देखा जाए तो रोजाना एटीएम में 7000 करोड़ ज्यादा रखे जा रहे हैं।

- देश में कुल 2.20 लाख एटीएम हैं, हर एटीएम को रोज 3 लाख 70 हजार रुपये की जरूरत है।

- अनुमान है कि 31 दिसंबर तक जनता को कुल 7 लाख 74 हजार करोड़ रुपये दिए जा सकेंगे।

- यानी बंद हुए 15 लाख 44 हजार करोड़ रुपये का आधा इस साल अंत तक आ आएगा।


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