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राजन ने फिर दी नसीहत- 'तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था' के टैग को लेकर उन्माद से बचें

पुणे (20 अप्रैल) : भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि केंद्रीय बैंकर को प्रैक्टीकल होना होता है, इस नाते वो उस उन्माद का शिकार नहीं हो सकते कि भारत सबसे तेज़ी से वृद्धि दर्ज़ करने वाली विशाल अर्थव्यवस्था है। राजन के मुताबिक देश को तय मकाम पर पहुंचने का दावा करने से पहले अभी लंबा सफ़र तय करना है। बता दें कि राजन ने हाल में एक इंटरव्यू में भारत की अर्थव्यवस्था को 'अंधों में काना राजा वाला' बताया था। राजन ने ताजा बयान से उसी टिप्पणी को सही ठहराने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, "ब्रिक्स देशों में भारतीयों की प्रति व्यक्ति आय सबसे कम है। हम हर भारतीय को मर्यादित आजीविका दे सकें, इसके लिए लगातार आर्थिक वृद्धि के इस प्रदर्शन को 20 साल तक बरकरार रखने की जरूरत है।"

राष्ट्रीय बैंक प्रबंधन संस्थान (NIBM) के दीक्षांत समारोह में राजन ने कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा महत्वपूर्ण है लेकिन इसे ऐसे देश के तौर पर देखा जा रहा है जिसने अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन किया है और उसे ढांचागत सुधार को कार्यान्वित, कार्यान्वित और कार्यान्वित करना चाहिए।  हालांकि, वह इस दिशा में अग्रसर है और लंबित सुधारों के साथ यह वृद्धि में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कर सकता है।

उन्होंने कहा, सार्वजनिक पदों पर बैठे लोग जो भी शब्द या मुहावरे बोलते हैं उनका अर्थ निकाला जाता है। जब शब्दों को अखबारों की सुर्खियों में बेवजह तूल दिया जाता है तो यह किसी के लिए आसान हो जाता है जो इसमें शरारत के लिए अपने अर्थ शामिल करना चाहता है।

अपनी अंधों में काना राजा टिप्पणी को स्पष्ट करते हुए राजन ने कहा कि उनकी टिप्पणियों को बेवजह अलग-थलग करके देखा गया और उन्होंने दृष्टिहीनों से माफी भी मांगी यदि उन्हें इस मुहावरे के इस्तेमाल से कोई तकलीफ हुई हो तो। 


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