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श्रीश्री रविशंकर का दावा, शनि शिंगणापुर पूजा विवाद सुलझा

दीपक दुबे, मुंबई (7 फरवरी): आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने दावा किया है कि शनि शिंगणापुर पूजा विवाद सुलझ गया है। श्रीश्री के मुताबिक नए फॉर्मूले के अनुसार मंदिर में अब न पुरुष और न ही महिलाएं चबूतरे पर चढ़कर पूजा कर सकेंगी, लेकिन इस फॉर्मूले पर आंदोलन कर रही भूमाता ब्रिगेड ने अपनी अलग मांग रख दी है कि महिला पुजारी हो और चबूतरे पर आखिरी पूजा महिलाओं के साथ हो।

भूमाता ब्रिगेड और शनि शिंगणापुर मंदिर अथॉरिटी से बातचीत के बाद श्रीश्री रविशंकर ने इस फॉर्मूले से विवाद सुलझने का दावा किया। श्री श्री रविशंकर के फॉर्मूले के मुताबिक, अब शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के अलावा पुरुष पर भी पाबंदी। पुरुष और महिलाओं दोनों को ही चबूतरे पर चढ़कर पूजा की अनुमति नहीं। सिर्फ पुजारी को चबूतरे पर चढ़कर मूर्ति को छूने की इजाजत, लेकिन आंदोलन कर रही भूमाता ब्रिगेड ने ही इस फॉर्मूले पर उठा दिए सवाल।

बैठक के बाद श्रीश्री ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट और भूमाता ब्रिगेड में सहमति बनी है कि मंदिर के 20 फुट के चबूतरे यानी गर्भ में पुजारी के अलावा पुरुषों और महिलाओं के चढ़ने पर पाबंदी होगी। रविशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों में इस बात पर सहमति बनी है कि मंदिर के चबूतरे पर पुरुषों के जाने पर भी पाबंदी लगायी जाएगी। 20 फुट के चबूतरे पर केवल पुजारी ही जाएंगी। सभी लोग मंदिर के बाहर से दर्शन करेंगे।

मामले को सुलझाने के लिए आगे आए श्री श्री रविशंकर ने कहा कि सभी महिलाएं काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं। तिरुपति बालाजी में भी सभी प्रवेश कर सकते हैं। आखिर शनि महाराज कैसे नाराज हो सकते हैं? यह सब भय की वजह से है। हम लोग भयभीत रहते हैं। हमने भय को आधार बना लिया।

हालांकि न्यूज24 से बातचीत में भू-माता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई ने कहा श्रीश्री रवि शंकर जी और शनि शिंगणापुर के साथ बातचीत विफल रही। तृप्ति देसाई ने कहा कि इस पूरी बैठक में पुरूष मानसिकता दिखी। ये लोग कहते है महिला और पुरुष में कोई अंतर नहीं, लेकिन यहां पुरुष मानसिकता साफ दिखा दी। वहीं शनि शिंगणापुर बचाव समिति का कहना है कि मीटिंग अच्छी रही और हम 400 साल पुरानी परंपरा नहीं टूटने देंगे। उन्‍होंने तृप्ति पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह पब्‍लिसिटी के लिए सब कर रही है। अगर सीएम देवेंद्र फडणवीस भी इनके हित में निर्णय देते तो कोर्ट जाएंगे।

बता दें श्रीश्री रविशंकर ने दोनों पक्षों में सुलह कराने के लिए मंदिर ट्रस्ट के सामने 2 प्रस्ताव भी रखे थे। प्रस्तावों के मुताबिक मंदिर के गर्भ में महिलाओं को पूजा अर्चना की इजाजत मिले या फिर पुरुषों को भी इसकी इजाजत ना हो। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के आश्वासन के बाद कल अहमदनगर के कलेक्टर अनिल कावड़े ने मंदिर ट्रस्ट और भूमाता ब्रिगेड की प्रमुख तृप्ति देसाई के साथ बैठक की थी।


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