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पति को 'मोटा हाथी' कहना भी तलाक के लिए एक पर्याप्त आधार: दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली (29 मार्च): दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि ओवरवेट पति को 'मोटा हाथी' कहना भी तलाक के लिए एक आधार है, क्योंकि यह शादी के बंधन के लिए 'हानिकारक' है।

'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, एक फैमिली कोर्ट की तरफ से एक शख्स को 2012 में तलाक दिया गया था। हाईकोर्ट ने 22 मार्च को इस फैसले को बरकरार रखा। इस मामले में पति की तरफ से कहा गया था कि उसे पत्नी की तरफ से बार बार निर्दयता का सामना करना पड़ता है। पत्नी उसके मोटे होने और कथित तौर पर उसकी सेक्सुअल डिज़ायर को संतुष्ट ना कर पाने की वजह से ऐसा व्यवहार करती थी। महिला ने फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 

जस्टिस विपिन संघी ने कहा, "अपीलकर्ता (महिला) की तरफ पति को इन नामों से बुलाना और पति के सम्मान में हाथी, मोटा हाथी और मोटा एलीफैंट जैसी गालियां देना, भले ही वह मोटा हो, उसके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को चोट पहुंचाता है।" महिला ने दलील देते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट ने तलाक देने के लिए 'अस्पष्ट और अविशिष्ट' आरोपों को आधार बनाया है। महिला ने तर्क दिया कि कथित निर्दयता के खास उदाहरणों की तारीख, समय आदि सूचनाएं नहीं दी गईं। 

इसके बाद भी हाईकोर्ट ने दलील खारिज कर दी। जस्टिस संघी ने कहा, "जब दो पार्टियां शादी के रिश्ते में बंधते हैं, तो ना तो एक लॉगबुक बनाना जरूरी होता है। ना ही दूसरे की तरफ से किए गए हर शादीशुदा अपराध की हर घटना को लिखकर रखा जाता है।" जज ने शख्स की तरफ से की गई दूसरी शिकायतों पर भी गौर किया, जिसमें उसने बताया था कि पत्नी ने ना केवल उसे थप्पड़ मारा बल्कि उससे घर से निकल जाने के लिए भी कहा। 

शख्स ने कहा कि पत्नी ने कैरोसीन डालकर खुद को आग लगाने और परिवार को दहेज के मामले में फंसाने की धमकी भी दी। शख्स ने आरोप लगाया, कि महिला ने अपनी जूलरी और दूसरे सामान के साथ घर छोड़ दिया और पति से उसके नाम से प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने के लिए भी कहा। अगर, वह उसे एक 'पतिव्रता पत्नी' के तरह चाहता है। 

हाईकोर्ट ने कहा, "ऐसी घटनाएं शादी के रिश्ते के लिए हानिकारक हैं। ऐसे में पति के लिए ये बिल्कुल आसानी से भरोसा कर लेना बनता है कि ऐसे में उसके लिए मानसिक रूप से भविष्य में शांतिपूर्वक रहना संभव नहीं है।"

शख्स ने यह भी कहा कि 11 फरवरी 2005 की रात को पत्नी ने उसके प्राइवेट पार्ट्स पर भी चोट कर उसे घायल कर दिया। जब वह उसके साथ संबंध बनाना चाहता था। जज ने कहा, "ये सभी घटनाएं अपीलकर्ता (महिला) के मैट्रिमोनियल ऑफेंसेस हैं। इन सभी घटनाओं शादी खत्म करने के नजरिए से साधारण नहीं कहा जा सकता।"


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