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बजट में रोजगार के लिए क्या होगा सरकार का रोडमैप

अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण सरकारी और निजी क्षेत्र में नौकरियां कम हो रही हैं। ऐसे में सवाल है कि बजट में मोदी सरकार का नौकरी के लिए रोडमैप क्या है। क्या सरकार रोजगार पैदा करने के लिए परंपरागत रास्ते में चलेगी या फिर कोई नया आइडिया पेश करेगी। दरअसल, गौर से देखें तो अब तक मोदी सरकार का फोकस स्वरोज़गार यानी SELF EMPLOYMENT पर रहा है।

मनीष कुमार, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली, 27 जनवरी:  अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण सरकारी और निजी क्षेत्र में नौकरियां कम हो रही हैं। ऐसे में सवाल है कि बजट में मोदी सरकार का नौकरी के लिए रोडमैप क्या है। क्या सरकार रोजगार पैदा करने के लिए परंपरागत रास्ते में चलेगी या फिर कोई नया आइडिया पेश करेगी। दरअसल, गौर से देखें तो अब तक मोदी सरकार का फोकस स्वरोज़गार यानी SELF EMPLOYMENT पर रहा है। मोदी सरकार ने चुनावों के दौरान हर साल दो करोड़ लोगों को रोज़गार देने का वादा था, लेकिन रोज़गार के आंकड़े अपने निचले स्तर पर है। बावजूद इस सच्चाई के सरकार दावा करती है कि आंकड़ों जो कहानी कह रहे हैं, हालात उससे जुदा हैं। सरकार ने रोज़गार के परंपरागत पैमाने से जुदा तरीके से रोज़गार के मौक़े पैदा किए हैं।

सरकार को ईपीएफ़ओ, मुद्रा लोन, स्टार्ट-अप बिजनेस, स्किल डेवलपमेंट जैसी योजनाओं से रोज़गार सृजन का यकीन है यानी सरकार सरकारी नौकरी के कम होते मौक़े के साथ-साथ निजी क्षेत्रों की नौकरी की सुस्ती को महत्व नहीं दे रही। 2019 के लोकसभा चुनाव के समय बीजेपी ने जो संकल्प-पत्र पेश किया, उसमें रोज़गार को लेकर ये बातें कहीं गईं...

रोज़गार पर बीजेपी का रोडमैप: 

- 2024 तक 100 लाख करोड़ रुपये इंफास्ट्रक्चर सुधार पर खर्च होगा

- महंगाई दर को 4 फीसदी तक रोकने की कोशिश होगी

- सेवा क्षेत्र में रोजगार के मौक़े बढ़ाने के लिए पर्यटन पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा

- नौजवानों और महिलाओं को रोज़गार के लिए कर्ज की सुविधा

- 20,000 करोड़ रुपये के सीड स्टार्टअप फंड बनाया जाएगा

रोज़गार पर इस रणनीति के साथ बीजेपी ने 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा। तब भी विपक्ष ने रोज़गार के मोर्चे पर मोदी सरकार पर हमला बोला लेकिन उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ख़ारिज कर दिया। 2019 के चुनाव में तो बीजेपी को ऐतिहासिक कामयाबी मिल गई, लेकिन चुनाव बाद जब अर्थव्यवस्था के आंकड़े आने लगे तो असलियत परत दर परत खुलने लगी। पहले विकास दर गिरा, आर्थिक सुस्ती दिखी और अब ये आंकड़े देश के सामने हैं कि नौजवानों के लिए नौकरी के मौक़े कम हैं।


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