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हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, गंगा को दी जीवित मनुष्य की संज्ञा

नई दिल्ली ( 20 मार्च ): उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गंगा नदी और भारत की पहली जीवित मानव( लिविंग पर्सन) की संज्ञा दी है। कोर्ट ने अपने इस फैसले में यमुना नदी को भी शामिल किया है उसको भी यही संज्ञा दी है। हरिद्वार निवासी मो. सलीम की 2014 में दायर की गई जनहित याचिका पर हुई सुनवाई में अदालत ने यह फैसला सुनाया।

सोमवार को वरिष्ठ न्यायाधीश संजीव शर्मा और न्यायमूर्ति अलोक सिंह की खंडपीठ ने हाईकोर्ट की असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार गंगा नदी को स्वच्छ और अविरल बनाने में असफल होती है, तो केंद्र सरकार अनुच्छेद 365 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में असफल होने की स्थिति में भंग करने का अधिकार रखती है।

यह फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने देहरादून के डीएम को ढकरानी की शक्ति नहर से 72 घंटे में अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए। साथ ही मामले में केंद्र सरकार को 8 सप्ताह में गंगा मैनेजमेंट बोर्ड बनाने और मुख्य सचिव, महानिदेशक और महाधिवक्ता को किसी भी वाद को स्वतंत्र रूप से न्यायालय में लाने के लिए अधिकृत किया।

हाईकोर्ट ने उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों के बटवारे के मामले में दोनों सरकारों को एक साथ बैठकर 8 सप्ताह में बटवारा करने को कहा है। याची के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया न्यूजीलैंड में भी वैनक्वाइ नदी को हाल ही में जीवित मानव के अधिकार दिए गए हैं ।


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