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आजादी की उस रात से तिरंगा बना रहा है 90 साल का ये शख्स

मेरठ(15 अगस्त): मेरठ में रहने वाले 90 साल के नत्थे सिंह तिरंगा बनाने का काम करते हैं। साल 1947 की उस रात को याद कर नत्थे सिंह के अंदर जोश भर जाता है। वह कहते हैं, वो दिन आज भी मुझे याद है जब देश आजाद होने की घोषणा हुई और लोग तिरंगा झंडा लेकर सड़कों पर उतर आए थे। जब सूचना आई तब रात के 12 बजे थे, उसी समय रात में ही मैंने तिरंगा झंडा बनाने का काम शुरू किया।

- वह कहते हैं, उस समय मेरे ताऊ लेखराज खादी का तिरंगा बनाते थे, मैं भी उनका हाथ बटाता था। अब मेरा बेटा रमेश और फैमिली के अन्य लोग भी इस काम में मेरा हाथ बंटाते हैं।

- ताऊ के बाद मैंने खुद देश के लिए तिरंगा झंडा बनाने का काम संभाल लिया। मेरा बनाया तिरंगा सरकारी ऑफिसों में फहराया जाता है। देश के सरकारी ऑफिसों में फहराया जाने वाला तिरंगा सिर्फ 3 जगहों पर ही बनाया जाता है।

- यह झंडा मेरठ के अलावा मुंबई और बिहार के अकबरपुर में तैयार किया जाता है। मुझे गांधी आश्रम से तिरंगा झंडा तैयार करने का आर्डर मिलता है, उसी के अनुसार झंडा तैयार करता हूं।

- इसे तैयार करने के बदले मुझे 9 रुपए से 15 रुपए तक मिलते हैं। एक दिन में औसत 60 झंडे ही एक व्यक्ति तैयार कर पाता है।

- मैं 90 साल का हो चुका हूं, लेकिन जब तक सांस हैं तब तक देश के लिए तिरंगा झंडा तैयार करता रहूंगा।

- नत्थे सिंह के बेटे रमेश चंद ने बताया, तिरंगा झंडा तैयार करते हुए उसके मानक का पूरा ध्यान रखा जाता है। भारत सरकार द्वारा निर्धारित साइज के अनुसार ही झंडे तैयार किए जाते हैं।

- झंडे की सिलाई को लेकर खास सावधानी बरतनी पड़ती है, तिरंगे के बीच में मौजूद चक्र सिलाई के दौरान दबना नहीं चाहिए, इसका खास ध्यान रखा जाता है।

- जब सिलाई के बाद झंडा तैयार हो जाता है, तब उसे सम्मान के साथ तह लगाकर रखा जाता है।


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