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अखिलेश बोले- योगी सरकार ने लोकार्पण और महोत्सव में निकाल दिए तीन साल

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री (Former Minister) और सपा मुखिया (Sp President) अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने मंगलवार को राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा।

Akhilesh Yadav, अखिलेश यादव

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(28 जनवरी): उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री (Former Minister) और सपा मुखिया (Sp President) अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने मंगलवार को राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने योगी सरकार (Yogi Government) पर हमला करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार (Bjp Government) के पूरे तान साल लोकार्पण और महोत्सवों के आयोजन में खत्म हो गए। उस सरकरा को अपना कुछ काम नहीं है। समाजवादी सरकार के कामों को ही अपना बताते रही। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार 'इवेंट मैनेजमेंट कमेटी' बन गई है, जिसने अब 'गंगा यात्रा' का नया 'इवेंट' शुरू कर लिया है। यादव ने कहा कि बीजेपी को भटकाव की राजनीति में महारथ हासिल है।

अखिलेश ने कहा कि मंहगाई, बेकारी और बिगड़ी कानून व्यवस्था का दूसरा नाम उत्तर प्रदेश बनता जा रहा है, सीएए के विरोध में जगह-जगह आक्रोश की आग सुलग रही है। महिलाएं चौका चूल्हा छोड़कर मैदान में उतर आई हैं और राज्य बीजेपी सरकार एवं मुख्यमंत्री को इन सबकी परवाह नहीं, वे खेल तमाशों में और भव्य आयोजनों में व्यस्त हैं। उन्होंने यहां एक बयान में कहा, 'बीजेपी सरकार के पूरे तीन साल तरह-तरह के लोकार्पण, महोत्सवों के आयोजनों में ही बीत गए हैं। उनका अपना तो कुछ काम हुआ नहीं, समाजवादी सरकार के कामों को ही अपना बताते रहे। उनकी सरकार 'इवेंट मैनेजमेंट कमिटी' बन गई है जिसने अब ‘गंगा यात्रा' का नया 'इवेंट' ईजाद कर लिया है।

उन्होंने कहा,'वैसे यह कोई नई बात नहीं है। प्रधानमंत्री ने नमामि गंगे के नाम पर खजाना खोल दिया, लेकिन गंगा मैली की मैली ही बनी हुई है। दिखावे के लिए ही ये अभियान चलाए गए हैं।' यादव ने कहा,'मुख्यमंत्री ने अपनी गंगा यात्रा में 56 राज्य मंत्रियों को लगा दिया है। केंद्रीय मंत्री भी इसमें शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में गंगा की लंबाई 1140 किली मीटर है और गंगा यात्रा 1338 किमी चलेगी।'

अखिलेश ने कहा कि गंगा मइया के नाम पर धोखे का यह धंधा 1985 से शुरू हुआ था जो 2000 में बंद हुआ। 15 साल में 900 करोड़ खर्च हुए। सन् 2014 में बीजेपी फिर गंगा सफाई में जुट गई। निर्मल गंगा के लिए कई लोगों ने अपनी जाने दे दी। तब बीजेपी की संवेदना नहीं जागी। अब इस नए 'इवेंट' के लिए यही कहा जा सकता है कि डबल इंजन सरकारें भी बहकाने में लग गई है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की गंगा यात्रा से गंगा किनारे और नदी से आजीविका कमाने वालों को कोई लाभ होने वाला नहीं है।'

उन्होंने कहा कि गंगा किनारे ज्यादातर मछुआरा समाज के लोग रहते है, समाजवादी सरकार ने 17 अति पिछड़ी जातियों --कश्यप, निषाद, बिंद, मल्लाह, केवट, कहार, गोंड, मांझी, राजभर, प्रजापति आदि को अनुसूचित जाति में डाला और बीजेपी सरकार ने ठीक से हाई कोर्ट में पैरवी ना करके इनका आरक्षण रूकवा दिया। उन्होंने कहा कि यह बीजेपी की गरीब केवट समाज के साथ हमदर्दी का दिखावा भर है।


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