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देश में 5 महीने में चाइल्ड पॉर्नोग्रफी के 25,000 मामले

मेरिका ने भारत को चाइल्ड पॉर्नोग्रफी से जुड़े होश उड़ा देने वाले आंकड़े सौंपे हैं। भारत के साथ शेयर की गई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पिछले 5 महीने में 25,000 से ज्यादा चाइल्ड पॉर्नोग्रफी मटीरियल अलग-अलग सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर अपलोड किया गया है। चाइल्ड प्रोनोग्राफी को लेकर गंभीर चर्चा के बीच ये आंकड़े डराने वाले हैं।

Child Pornography

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (28 जनवरी): अमेरिका (USA) ने भारत (India) को चाइल्ड पॉर्नोग्रफी (Child Pornography) से जुड़े होश उड़ा देने वाले आंकड़े सौंपे हैं। भारत के साथ शेयर की गई रिपोर्ट (Report) के मुताबिक भारत में पिछले 5 महीने में 25,000 से ज्यादा चाइल्ड पॉर्नोग्रफी मटीरियल अलग-अलग सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर अपलोड किया गया है। चाइल्ड प्रोनोग्राफी को लेकर गंभीर चर्चा के बीच ये आंकड़े डराने वाले हैं। अमेरिकी की एजेंसी नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटेड चिल्डेन (NCMEC) और भारत के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने मिलकर ये आंकड़े जुटाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन मामलों में कंटेंट अपलोड करने वालों पर FIR और उनकी गिरफ़्तारी की भी पूरी तैयारी कर ली गई है।

Child Pornography

दरअसल, पिछले साल अमेरिका और भारत के बीच इस तरह का आंकड़ा शेयर करने को लेकर एक समझौता हुआ था। अमेरिकी एजेंसी ने जो आंकड़ा साझा किया है वो बीते 23 जनवरी तक का है। हैरानी की बात है कि चाइल्ड प्रोनोग्राफी से जुड़ा मैटेरियल सोशल मीडिया पर अपलोड करने के मामले में राजधानी दिल्ली पहले नंबर पर है। इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात, यूपी और पश्चिम बंगाल का नंबर आता है। एक अनुमान के मुताबिक महाराष्ट्र में ऐसे करीब 1700 मामले सामने आये हैं। इन राज्यों ने आंकड़ा सामने आने के बाद से गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हो गया है।

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Child Pornography

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक NCMEC की रिपोर्ट सामने आने के बाद देश भर में गिरफ्तारियां की जा रही है। बताया जा रहा है कि NCMEC के साथ पिछले साल समझौता किया गया था जिससे भारत को ये रिपोर्ट्स मिलती हैं। 23 जनवरी तक पिछले पांच महीने में ऐसे 25 हजार मामले सामने आ चुके हैं। बताया जा रहा है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब इस तरह का डेटा शेयर किया गया है।  

आपको बता दें कि ये जानकारी जुटाने के लिए खबरियों, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स से लेकर सॉफ्टवेयर्स तक का इस्तेमाल किया जाता है जो न्यूडिटी और बच्चे के चेहरे पर दिखने वाले एक्सप्रेशन्स के बेसिस पर विडियो को जांच के लिए फॉरवर्ड करते हैं। गौरतलब है कि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेज (पॉक्सो) (अमेंडमेंट) ऐक्ट, 2019 में चाइल्ड पॉर्नोग्रफी के अंतर्गत 'फोटो, विडियो, डिजिटल या कंप्यूटर से बनाई तस्वीर जो असली बच्चे जैसी हो, या ऐसी तस्वीर जिसे बनाया गया हो, अडैप्ट किया हो या मॉडिफाई किया हो लेकिन बच्चे जैसी लगे', यह सब आता है। 

(Image Credit: Google)


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