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गोरखनाथ मंदिर पहुंचते ही सबसे पहले इस मुस्लिम से मिलते हैं योगी आदित्यनाथ

नई दिल्ली(21 मार्च): यूपी के नवनिर्वाचित सीएम योगी आदित्यनाथ की इमेज एक कट्टर हिंदू के तौर पर है। लेकिन असल कहानी कुछ और है। योगी की जैसी छवि वैसे वह हैं नहीं।

- आपको जानकार हैरानी होगी कि पिछले 35 सालों में मंदिर यदि कोई नींव रखी गई तो वो मोहम्मद यासीन अंसारी की देखरेख में ही रखी गई।

- यहां तक कि निर्माण कार्य में खर्च होने वाले लाखों-करोड़ों रुपयों को भुगतान उन्हीं की अनुमति पर होता है।

- यासीन कहते हैं कि छोटे महराज यानि महंत आदित्यनाथ कहीं से भी मंदिर में आते हैं तो सबसे पहले उनसे मिलते हैं और निर्माण कार्य की जानकारी लेते हैं।

- वे किचेन से लेकर बेडरूम तक आते-जाते हैं और साथ बैठकर खाना भी खाते हैं, लेकिन उन्हें योगी के अंदर कभी भी एंटी मुस्लिम छवि नहीं दिखी।

- हां, योगी आदित्यनाथ उनसे नफरत करते हैं, जो खाते हिन्दुतान का हैं और गाते कहीं और की हैं। वो व्यक्ति हिंदू हो या मुसलमान।

- योगी को झूठ बोलने से बेहद नफरत है, वे ईमानदार हैं और दूसरों से उसी की अपेक्षा करते हैं।

- वो गरीबों की मदद खुलकर करते हैं।

- मोहम्मद यासीन अंसारी ने बताया कि उनके बड़े अब्बा वली मोहम्मद सबसे बड़े महंत ब्रह्मलीन दिग्विजयनाथ के समय में पीपीगंज, गोरखपुर से मंदिर आए थे।

- भंडार उन्हीं के जिम्मे था। सास हमीदा बेगम राशन भंडार कक्ष में रहती थी और गेहूं-चावल आदि साफ-सफाई की जिम्मेदारी देखती थीं। श्वसुर स्व. जग्गन माली 

थे।

- मोहम्मद यासीन अंसारी योगी आदित्यनाथ के गुरू ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ के समय में मई 1977 में मंदिर से जुड़े।

- 1977-83 से यासीन मंदिर में बतौर कैशियर रहे।

- 1983 से लेकर आज तक वे मंदिर के सुपरवाइजर के पद पर हैं।

- मंदिर परिसर में मंदिर का निर्माण हो या भवन का सौंदर्यीकारण, या फिर कोई अन्य भवन यदि उसकी एक ईंट भी रखी जाती है तो वह इनकी निगरानी में रखी जाती है।

- मोहम्मद यासीन अंसारी पहले मंदिर में ही एक कमरे में रहते थे, लेकिन जिम्मेदारी बढ़ने के साथ ही मकान छोटा पड़ने लगा।

- गोरखनाथ मंदिर के पीछे रसूलपुर मोहल्ले में उन्होंने अपना घर बनवा लिया है। यहां वे पत्नी सलीमुन्निशा, बेटे अब्दुल करीम अंसारी, मोहम्मद सलीम अंसारी, दो बहुएं अजरा निशात, अर्शी बेटियों जरीना और फरजाना खातून के साथ रहते हैं।

- यासीन कहते हैं कि उनके यहां योगी जी शादी ब्याह और अन्य अवसरों पर न सिर्फ आर्थिक मदद करते हैं बल्कि एक दो घंटे मौजूद भी रहते हैं।

-अब उन्हें बेटी फरजाना की शादी करनी है। सीएम हो गए हैं तो क्या वे हमारी बेटी की शादी में जरूर रहेंगे।

- उन्होंने बताया कि गायों की देखरेख शान मोहम्मद करता है। मंदिर और उसकी 3 दर्जन से अधिक संस्थाओं से सैकड़ों मुस्लिम परिवार जुड़कर अपने घर का चूल्हा जला रहे हैं।


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