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जिस संदीप का सुषमा ने किया जिक्र, ये है उसके परिवार की दर्दनाक कहानी

नई दिल्ली (20 मार्च): इराक में मारे गए 39 भारतीयों की मौत की पुष्‍टि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कर दी है। सुषमा ने संसद में यह जानकारी देते हुए कहा कि सबसे पहले डीएनए मिलाने के दौरान संदीप नाम के शख्स की पहचान की गई। हालांकि उन्होंने यह जानकारी नहीं दी कि संदीप कहां का रहने वाला था।

वैसे न्यूज 24 ने संदीप के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि 32 वर्षीय संदीप इराक में कारपेंटर का काम करता था।

परिवार में हैं ये लोग... संदीप के परिवार में उनकी मां सुमित्रा और पिता तरसीम के अलावा 4 बहने हैं, जिसमें से दो की शादी हो चुकी है। उसका एक भाई है, जो 25 साल का है। संदीप पंजाब के जालंधर के अलीवाल गांव को रहने वाला था। संदीप के साथ उसका मामा भी इराक गया था, जिसका नाम नंद लाल था। नंदलाल जालंधर के तलवान गांव का रहना वाला है।

आखिरी बार तब हुई थी बात: नंदलाल ने 11 और संदीप ने 13 जून 2014 को परिवार से आखिरी बार बात की थी। नंदलाल ने अपनी बहन सुमित्रा को बताया था कि उनको मोसुल में बंधक बना लिया गया है, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है और उनको एक या दो दिन में छोड़ दिया जाएगा। संदीप की मां ने बताया कि उसके दो दिन बाद संदीप का फोन आया था और उसने कहा था कि वह दो दिन में भारत आ जाएगा।

संदीप को नंदलाल ही काम करने के लिए इराक ले गया था। सुमित्रा ने बताया कि नंदलाल का तलाक हो चुका है और उसकी कोई संतान नहीं थी। बाकियों की तरह संदीप ने भी इराक जाने के लिए 1.60 रुपये का कर्ज लिया था और अगवा होने से पहले उसने 58,000 रुपये घरवालों को भेजा था। संदीप इससे पहले डेढ़ साल तक दोहा में काम कर चुका था।

अब इस परिवार में एकमात्र कमाने वाला प्रदीप ही है, जो एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करता है। हालांकि पंजाब सरकार से उनको 20 हजार रुपये महीने की मदद भी मिलती है।


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