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मेघायल, त्रिपुरा और नागालैंड में किसकी बनेगी सरकार, होगा साफ

नई दिल्ली (3 मार्च): नॉर्थ ईस्ट के तीन राज्य त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय विधानसभा चुनाव के रुझान अब से सिर्फ एक घंटे बाद आने शुरू हो जाएंगे। इन राज्यों में लेफ्ट, कांग्रेस और बीजेपी समेत क्षेत्रीय पार्टियों के लिए ये चुनाव करो या मरो जैसे हैं। बीजेपी और आरएसएस ने तीनों राज्यों में गांव-गांव तक काम किया है। नरेंद्र मोदी-अमित शाह की टीम ने आक्रामक कैंपेन किया है। त्रिपुरा में 25 साल से सत्ता में लेफ्ट सरकार फिर से सरकार बनाने की उम्मीद में है। वहीं, मेघालय में कांग्रेस की मुकुल संगमा सरकार और नागालैंड में नगा पीपुल्स फ्रंट की मौजूदा सरकार को बीजेपी से कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है।

पूर्वोतर के तीन राज्यों में कांग्रेस और लेफ्ट का लिटमस टेस्ट होने जा रहा है। बीजेपी के मिशन 2019 के लिए त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड का चुनाव मील का पत्थर साबित हो सकता है। त्रिपुरा में 25 साल से सत्ता में लेफ्ट सरकार फिर से सरकार बनाने की उम्मीद में है। वहीं, मेघालय में कांग्रेस की मुकुल संगमा सरकार और नगालैंड में नगा पीपुल्स फ्रंट की मौजूदा सरकार को बीजेपी से कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है। त्रिपुरा में 25 साल से लेफ्ट की सरकार है।

मणिक सरकार की खासियत उनकी बेदाग छवि है। इनके पास खुद का न मोबाइल है, न घर है, न कार है वो सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इसी बात को लेकर युवाओं में नाराजगी है। आरोप लगते हैं कि राज्य आईटी सेक्टर में पिछड़ा है। इसके साथ ही सरकार की हिंदूविरोधी नीति, बेरोजगारी और विकास न होने के आरोप के बीच वह एंटी-इनकंबेंसी की मार झेल सकती है।

बीजेपी के मिशन 2019 के लिए त्रिपुरा का चुनाव काफी अहम है, क्योंकि लगभग सभी एक्टिज पोल यहां बीजेपी को बढ़त दिखा रहे हैं। अभी नॉर्थ ईस्ट की 7 सीटों में से असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर में बीजेपी की सरकार है। अगर तीन सीटों में से एक या दो सीटें भी बीजेपी अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर निकाल लेती है, पूर्वोत्तर में बीजेपी का दबदबा बढ़ जाएगा। जिसका सीधा फायदा 2019 में मिलेगा। अगर कांग्रेस मेघालय हार जाती है तो वह सिमटकर सिर्फ दो राज्य कर्नाटक और पंजाब में रह जाएगी जिससे बीजेपी कांग्रेस मुक्त भारत की राह में एक कदम और आगे बढ़ जाएगी। साथ ही लेफ्ट के हाथ से अगर त्रिपुरा चला जाता है तो उसके पास सिर्फ केरल बचेगा।

अगर हम मेघालय की बात करें तो कांग्रेस मौजूदा सीएम मुकुल संगमा की लीडरशिप में चुनाव लड़ रही है। एनपीपी ने सीएम के लिए किसी का नाम आगे नहीं किया है। हालांकि, कहा जा रहा है कि अगर एनपीपी चुनाव जीतती है तो मुकुल संगमा की बहन और पूर्व सांसद अगाथा संगमा सीएम हो सकती हैं। बीजेपी ने किसी का नाम आगे नहीं किया है। यहां भी नरेंद्र मोदी और बीजेपी के नाम पर चुनाव लड़ा जा रहा है

मेघालय में ड्रग्स, डेवलपमेंट और हेल्थ के मुद्दे पर चुनाव लड़ा गया। नागालैंड में 15 साल से नेशनल पीपुल्स फ्रंट  की सरकार है। बीजेपी ने चुनाव से पहले मास्टर स्ट्रोक खेला और एनपीएफ से गठबंधन तोड़कर इसी पार्टी के बागी नेताओं-विधायकों के नए दल नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी एनडीपीपी से हाथ मिला लिया। बीजेपी को आशंका ती कि राज्य में सत्ता विरोधी लहर चल रही है। चुनाव से पहले बीजेपी और एनडीपीपी ने किसी नेता को आगे नहीं किया। एनपीएफ के पूर्व नेता और तीन बार सीएम रह चुके नेफ्यू रियो एनडीपीपी के संभावित कैंडिडेट हो सकते हैं क्योंकि वो नरेंद्र मोदी की पहली पसंद है।


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