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अयोध्या मामले की तरह तीन तलाक भी आस्था का विषय: कपिल सिब्बल

नई दिल्ली (16 मई): सुप्रीम कोर्ट में चौथे दिन भी तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई जारी रही। इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने अपनी दलील में कहा है कि अगर राम का अयोध्या में जन्म होना, आस्था का विषय हो सकता है तो तीन तलाक भी आस्था का मामला है। इस पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए।

इस मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि तीन तलाक 637 ईसवी से है। इसे गैर-इस्लामिक बताने वाले हम कौन होते हैं? मुस्लिमों में यह प्रथा 1400 साल से है। यह आस्था का मामला है। अगर राम का अयोध्या में जन्म होना, आस्था का विषय हो सकता है तो तीन तलाक भी आस्था का मामला है। ऐसे में इसकी संवैधानिक नैतिकता और समानता का सवाल ही नहीं उठता।

सुप्रीम कोर्ट में हो रही तीन तलाक की सुनवाई बेंच में चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं। इस बेंच की खासियत यह है कि इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी धर्म को मानने वाले जज शामिल हैं। इस मसले का जल्द निपटारा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गर्मी की छुटि्टयों में रोज सुनवाई की शुरुआत हुई है।


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