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पाकिस्तान में आतंकी हाफिज़ सईद ने शुरू कीं शरिया अदालत

नई दिल्ली (7 अप्रैल): यूनाईटेड नेशंस की मोस्ट वांटेड लिस्ट में दर्ज़ जमात-उत-दावा के सरगना हाफिज़ सईद ने पाकिस्तान की नवाज़ शरीफ सरकार और पाकिस्तान के संविधान को ठेंगा दिखाते हुए देश भर में हाई कोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के समानांतर शरिया अदालतें खोल दी हैं। हाफिज़ सईद के तैनात किये हुए काज़ी-ख़ादिम और कारिंदे लोगों को सम्मन भेज रहे हैं। अदालत में हाज़िर न होने पर शरिया के मुताबिक सख्त सज़ा का खौ़फ दिखा रहे हैं। मगर, नवाज़ सरकार के अलम्बरदार ख़ामोश बैठे हैं।

पाकिस्तान के अखबार 'डॉन' ने दावा किया है कि उसके पास जमात-उत-दावा की गठित की गयी शरिया अदालतों के सम्मन की कॉपी मौजूद है। 'डॉन' ने यह भी लिखा है कि पाकिस्तान की मौजूदा परंपरागत अदालतों में इंसाफ मिलने में काफी समय लगता है। इसलिए लोग जमात-उत-दावा की शरिया अदालतों का रुख कर रहे हैं। हालंकि 'डॉन' ने यह भी लिखा है कि ये शरिया अदालतें पाकिस्तान के संवाधान का उल्लंघन है। जमात-उत-दावा का कहना है कि वो एक सोशल-चैरिटेबुल ऑर्गेनाईजेशन है। आपदा ग्रस्त इलाकों में राहत कैंपों के अलावा स्कूल और अस्पतालों के जरिए वो समाज और देश की सेवा कर रहा है।

'डॉन' ने जमात-उत-दावा के प्रवक्ता याहिया मुज़ाहिद का बयान भी छापा है। याहिया का कहना है कि शरिया अदालतों में मुकदमे उनकी मर्ज़ी से लिये जा रहे हैं और शरिया के मुताबिक इंसाफ किया जा रहा है। हालांकि याहिया ने शरिया अदालतों को समानांतर जुडिशीयल सिस्टम मानने से इंकार किया है। 'डॉन' ने पाकिस्तान बार कौंसिल के वरिष्ठ सदस्य आज़म नाज़िर तरार के हवाले से लिखा है, कि पाकिस्तान की अदालतें क़ुरान, सुन्नाह और शरिया क़ानून के मुताबिक चल रही हैं। पाकिस्तान का संविधान भी क़ुरान और शरिया के अलावा किसी क़ानून या अदालत को मान्यता नहीं देता। इन हालात में अलग से शरिया अदालतें बना कर इंसाफ बांटना संविधान के खिलाफ और नाफरमानी है।

इसके विपरीत लाहौर के डिप्टी इंस्पैक्टर जनरल ऑप्रेशंस डॉक्टर हैदर अशरफ ने शरिया अदालतों के बारे में कोई जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया। उन्होंन कहा कि जब कोई शिकायत आयेगी तो जरूर देखेंगे। 


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