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चीन-अमेरिका में बढ़ीं तल्खियां, युद्ध के हालात !

नई दिल्ली (16 दिसंबर): अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता की बागडोर अभी नहीं संभाली है परंतु उन्होंने वाशिंग्टन और बीजींग के मध्य बहुत सारे मतभेदों को हवा दे दी है और ओबामा सरकार ने भी चीन के मुकाबले में आक्रामक नीति अपना ली है। यह स्थिति इस बात का कारण बनी है कि चीनी सरकार ने अपनी  चेतावनी में अमेरिका के साथ राजनीतिक संबंधों को जारी रखने को वाशिंग्टन द्वारा अखंड चीन पालिसी के प्रति कटिबद्ध रहने और अतीत में दोनों पक्षों के मध्य होने वाले समझौतों से जोड़ दिया है।

इसी मध्य प्रशांत महासागर में अमेरिकी बेड़े के प्रमुख एडमिरल हेरी बी हेरीस जुनियर ने  कहा है कि अगर चीन दक्षिणी चीन सागर में अपना दावा जारी रखता है तो अमेरिका चीनी सरकार से मुकाबले के लिए तैयार है। उनका यह बयान इस बात का सूचक है कि  वाशिंग्टन चीन के साथ एक गम्भीर चुनौती से मुकाबले की तैयारी कर रहा है।

चीन के साथ आर्थिक सहकारिता और पूंजी निवेश पर अमेरिका को कुछ आपत्ति है। क्योंकि चीन ने अमेरिका के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर रखा है। चीन ने अमेरिका से जो बान्डस पेपर खरीद रखे हैं उनकी कीमत साढ़े 12 अरब से 1270 अरब डालर तक है। इस आधार पर अमेरिका को आर्थिक क्षेत्रों में चीन के साथ निवेश जारी रखने और आर्थिक समस्याओं के समाधान में चीन की सहायता की आवश्यकता है।

इन सबके बावजूद वाशिंग्टन चीन की आर्थिक सहकारिता पर आपत्ति जताकर अमेरिकी उत्पादों के लिए चीनी मंडियों के अधिक द्वार खोलने हेतु एक प्रकार से बीजींग पर दबाव डालने के प्रयास में है।


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