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मोदी सरकार ने किया साफ, ताजमहल मंदिर नहीं मकबरा है

नई दिल्ली (21 फरवरी): ताजमहल को मंदिर बताने वालों को मोदी सरकार ने एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट में सरकार ने ताजमहल को मंदिर नहीं बल्कि मकबरा करार दिया है। भारत सरकार व पुरातत्व विभाग ने अपना जवाब सिविल कोर्ट में दाखिल कर कहा है कि ताजमहल शिवालय है ऐसा कोई सबूत नहीं है। पुरातत्व विभाग ने भी स्पष्ट कहा है कि यह शाहजहां द्वारा बनवाया गया मकबरा है।

अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ के माध्यम से 8 अप्रैल 2015 को अदालत में परिवाद दाखिल किया गया था। इसमें भारत सरकार, गृह मंत्रालय, पुरातत्व विभाग और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को पार्टी बनाया गया है। उन्होंने कोर्ट में दाखिल याचिका में दावा किया है कि ताजमहल पूर्व में तेजो महालय मंदिर था, जिसका नाम तेजो महालय था।

इस मामले में केंद्र सरकार ने जवाब में कहा है कि शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था। इस संबंध में कई शासनादेश और कई सबूत भी हैं। ताजमहल एक संरक्षित स्मारक और भारत सरकार की संपत्ति है। मुद्दई द्वारा फूलपत्ती, कलश आदि का जो अर्थ लगाया गया है वह काल्पनिक है इसका कोई सबूत, दस्तावेज दाखिल नहीं है।


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