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उत्तराखण्ड के बागियों पर संशय बरकरार, शाम तक फैसले की संभावना

 नई दिल्ली (27 मार्च): उत्तराखंड के चीफ मिनिस्टर हरीश रावत की कथित सीडी सामने आने और मोदी सरकार द्वारा राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की आशंका के बीच विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने देर रात कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता निरस्त कर दी है। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है। उत्तराखण्ड की संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा ह्रदयेश ने कहा है कि सभी बागी विधायकों को एक मौका और दिया गया है। उनको सुन लेने के बाद ही विधान सभ अध्यक्ष कोई फैसला लेंगे।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत सहित नौ बागी विधायकों को इससे पहले 19 मार्च को दल बदल कानून के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जवाब देने के लिए सात दिन का समय देते हुए 26 मार्च को शाम पांच बजे तक का समय निर्धारित किया गया था। शनिवार को देर शाम तक कांग्रेस के बागी विधायकों ने अपने प्रतिनिधियों के जरिये जवाब भी दाखिल कर दिया था, वहीं स्पीकर से अधिक समय दिए जाने की मांग भी की। इस पर स्पीकर ने बागी विधायकों की मांग पर उन्हें रविवार सुबह नौ बजे तक का समय जवाब को पुष्ट करने और अन्य डॉक्यूमेंट जमा करने के लिए दे दिया।

माना जा रहा है कि बागी विधायकों को कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मौका देने से बचने के लिए सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई 27 मार्च की शाम तक ही की जाएगी। देर रात मिली जानकारी के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरक सिंह, उमेश शर्मा काऊ, प्रदीप बतरा, सुबोध उनियाल, शैलेंद्र मोहन सिंघल, शैलारानी रावत, अमृता रावत और कुंवर प्रणव की सदस्यता समाप्त कर दी, मगर अधिकारिक घोषणा नहीं की है।

 


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