News

टेलीकॉम एजीआर मामला: इस देश में कानून है या नहीं- SC

सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर वैधानिक बकाये का भुगतान में देरी को लेकर टेलीकॉम कंपनियों को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही कोर्ट ने दूरसंचार एवं अन्य कंपनियों के निदेशकों, प्रबंध निदेशकों से पूछा कि एजीआर बकाये के भुगतान के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने को लेकर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?

Supreme Court

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली (14 फरवरी): सुप्रीम कोर्ट Supreme Court ने एजीआर (AGR) यानी एडजस्टेड ग्रॉस रिवेन्यू मामले में भारती एयरटेल, वोडाफोन- आइडिया, रिलायंस कंम्युनिकेशन, टाटा टेलीसर्विसेज और अन्य दूरसंचार कंपनियों के प्रबंध निदेशकों (एमडी) 17 मार्च को व्यक्तिगत तौर पर तलब (Summons) किया है। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने इन कंपनियों (Telecom Industry) के प्रबंध निदेशकों को अवमानना (Contempt) का नोटिस (Notice) जारी करते हुए सभी 17 मार्च को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि ये लोग कोर्ट में आकर बताएं कि उनकी कंपनियों ने अब तक रुपये क्यों नहीं जमा कराए गए। जस्टिस अरुण मिश्रा ने सरकार से भी पूछा कि दूरसंचार विभाग ने यह अधिसूचना कैसे जारी किया कि अभी भुगतान ना करने पर कंपनियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करेंगे। 

जस्टिस अरुण मिश्रा ने पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को कैसे ' रोका ' गया। उन्होंने कहा, "किस अधिकारी ने इतनी जुर्रत की कि हमारे आदेश पर रोक लगा दिया। यदि एक घंटे के भीतर आदेश वापस नहीं लिया गया, तो उस अधिकारी को आज ही जेल भेज दिया जायेगा।" सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमारे आदेश के बावजूद ये रकम जमा नहीं हुई, हम अचंभित हैं कि एक पैसा भी जमा नहीं कराया गया। देश में क्या हो रहा है, ये बिल्कुल बकवास है, हमें जो कहना था हम कह चुके है।"  जस्टिस अरुण मिश्रा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि "लगता नहीं कि इस देश में कोई कानून बचा है ? मुझे इस देश में बिल्कुल भी काम नहीं करना चाहिए।" जस्टिस मिश्रा ने कहा कि ये याचिकाएं दाखिल नहीं करनी चाहिए थीं, ये सब बकवास है, क्या सरकारी डेस्क अफसर शीर्ष अदालत से बढकर है जिसने हमारे आदेश पर रोक लगा दी।

गौरतलब है कि एजीआर के तहत क्या-क्या शामिल होगा, इसकी परिभाषा को लेकर टेलीकॉम कंपनी और सरकार के बीच विवाद चल रहा था। टेलीकॉम कंपनियां सरकार के साथ लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज शेयरिंग करती है। सुप्रीम कोर्ट की परिभाषा के अनुसार, किराया, संपत्ति की बिक्री पर मुनाफा, ट्रेजरी इनकम, डिविडेंड सभी एजीआर में शामिल होगा।  वहीं, डूबे हुए कर्ज, करंसी में फ्लकचुएशन , कैपिटल रिसिप्ट डिस्ट्रीब्यूशन मार्जन एजीआर में शामिल नहीं करने का आदेश दिया गया है। 

यह भी पढ़ें : उमर अब्दुल्ला की रिहाई की मांग वाली याचिका पर SC में सुनवाई आज

(Image Credit: Google)


Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 and Download our - News24 Android App . Follow News24online.com on Twitter, YouTube, Instagram, Facebook, Telegram , Google समाचार.

Tags :

Top