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SC ने अरूणाचल पर केंद्र को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

नई दिल्‍ली (27 जनवरी): अरूणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले में अगली सुनवाई एक फरवरी को होगी।

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यपाल जेपी राजखोवा से 15 मिनट में जानकारी उपलब्ध कराने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल से 15 मिनट के अंदर ई-मेल द्वारा रिपोर्ट मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि राष्‍ट्रपति शासन लगाने से पहले हमें इस बारे में जानकारी क्‍यों नहीं दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल के गर्वनर से जवाब मांगते हुए पूछा कि जब यह मामला कोर्ट में था तो राष्‍ट्रपति शासन क्‍यों लगाया गया।

वहीं प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की तीखी आलोचना करते हुए कांग्रेस, जदयू, भाकपा और आप ने इसे संघवाद और लोकतंत्र की ‘हत्या’ करार दिया और भाजपा नीत केंद्र सरकार पर देश की सर्वोच्च अदालत को ‘अपमानित’ करने का आरोप लगाया जो अभी मामले की सुनवाई कर रही है।

दरअसल, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पिछले दो दिनों में गहन विचार-विमर्श के बाद केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी प्रदान कर दी थी और इस आधार को स्वीकार कर लिया कि राज्य में ‘संवैधानिक संकट’ है, तथा यहां पर राष्‍ट्रपति शासन लगाया जाए। पिछले कई दिनों से राज्य में राजनीतिक अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी।

क्‍या है मामला: 60 सदस्यों वाली अरुणाचल विधानसभा में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के 47 विधायक थे, जिसमें 21 विधायकों ने अपनी ही पार्टी और मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावत कर राज्य के डिप्टी स्पीकर को विधायक दल का नेता चुन लिया। बीजेपी के 11 विधायकों ने भी इसका समर्थन किया, जिसके चलते नबाम टुकी की सरकार अल्पमत में आ गई और राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बन गई।


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