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अब सौतेले मां-बाप भी बच्चे को ले सकेंगे गोद

नई दिल्ली(9 जनवरी): नए नियम के तहत अब सौतेले माता-पिता अपने बच्चों को राष्ट्रीय दत्तक संस्था (नैशनल अडॉप्शन बॉडी) के जरिए गोद ले सकते हैं। वे उनके साथ अपने रिश्ते को कानूनी रूप दे सकते हैं।

- नए नियम 16 जनवरी से लागू हो जाएंगे। इनके तहत अब रिश्तेदार भी बच्चों को गोद ले सकेंगे।

- केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के सीईओ लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार ने कहा कि भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है, जो सौतेली मां या पिता और सौतेले बच्चे के बीच कानूनी रिश्ते की व्याख्या करता हो।

- सौतेले बच्चे का सौतेली मां या सौतेले पिता की संपत्ति पर अधिकार नहीं होता। बच्चा भी अपने उनकी बुढ़ापे में देखभाल करने के लिए कानूनन बाध्य नहीं होता। हम इन्हीं खामियों को दूर करना चाहते हैं। कारा केंद्र सरकार के तहत एक संस्था है, जो देश में सभी दत्तक प्रक्रियाओं की निगरानी और नियमन करती है।

- पहले केवल अनाथ, छोड़ दिए गए या संरक्षण छोड़े गए बच्चे को ही गोद लिया जा सकता था। अब सरकार ने गोद दिए जा सकने वाले बच्चों की परिभाषा को और व्यापक करते हुए इसमें किसी रिश्तेदार के बच्चे, पूर्व विवाह से पैदा बच्चे या जैविक माता-पिता द्वारा जिस बच्चे का संरक्षण छोड़ दिया गया हो, उन्हें भी शामिल कर दिया है। इसके चलते ऐसे बच्चों को भी अब गोद लिया जा सकता है।

- सौतेले मां या पिता के मामले में दंपती, जिसमें से एक बच्चे का बायलॉजिकल जन्मदाता, हो उसे चाइल्ड अडॉप्शन रिसोर्स इन्फर्मेशन ऐंड गाइडेंस सिस्टम में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। गोद लेने के लिए दूसरे बायलॉजिकल पैरंट की जरूरत होगी और अडॉप्शन ऑर्डर लेने के लिए कोर्ट में ऐप्लिकेशन देना होगा। इसी तरह, किसी रिश्तेदार द्वारा अडॉप्शन के मामले में संभावित माता-पिता को बच्चे के बायलॉजिकल पैरंट्स से मंजूरी लेनी होगी। अगर वे जीवित नहीं हैं तो बाल कल्याण समिति से इजाजत लेनी होगी।


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