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फौजियों का त्योहार रह सकता है फीका

नई दिल्ली(9 अक्टूबर): देश में इन दिनों पीओके में सेना की सर्जिकल स्ट्राइक की ही चर्चाएं हो रही हैं और पाकिस्तान की तरफ से संभावित बदले की कार्रवाई की आशंका को देखते हुए सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है। लेकिन सशस्त्र बलों को न सिर्फ पाकिस्तानी आतंकवादियों के घुसपैठ के खिलाफ लड़ना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें सरकार से पे स्केल की लड़ाई भी लड़नी पड़ रही है। 

- पूर्व सैनिक अब कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

- सैनिकों को अब तक संसोधित वेतन या एरियर्ज नहीं मिला है, जबकि उनके सिविलियन काउंटरपार्ट्स को ये सौगातें मिल चुकी हैं। इसकी वजह वेतन आयोग को लेकर मतभेद है। त्योहारों के इस सीजन में सेवारत और रिटायर्ड फौजी निराश हैं। 

- सरकार भी विकल्पों पर विचार कर रही है, जिसमें बकाए वेतन-भत्ते और एरियर्ज का वन-टाइम पेमेंट का विकल्प भी शामिल है।

- सशस्त्र बल नए वेतन आयोग के प्रावधानों से खुश नहीं हैं। वेतन और पेंशन के मामले में वे अर्धसैनिक बलों के बराबर हैं, कुछ मामलों में तो यह अर्धसैनिक बलों से भी कम है। 

- रिटायर्ड फौजी 'अक्षमता पेंशन' में कटौती से भी नाराज हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के एक दिन बाद ही 30 सितंबर को सरकार ने 'अक्षमता पेंशन' का नोटिफिकेशन जारी किया था। 

- पूर्व सैनिकों का कहना है कि नए नियमों के मुताबिक सातवें वेतन आयोग के बावजूद भी कई पेंशनभोगियों के पेंशन में 3 हजार से लेकर 5 हजार की कटौती देखने को मिलेगी।


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